राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग- एनसीएसटी ने पश्चिम बंगाल में ममता बैनर्जी सरकार की निंदा की है। आयोग ने कहा है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा को देखते हुए जनजातीय समुदाय भय के माहौल में है। अपनी रिपोर्ट में आयोग ने कहा है कि जनजातीय समुदाय पुलिस और राजस्व अधिकारियों के समक्ष हिंसा की शिकायतें भी दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट पश्चिम बंगाल के मुख्यसचिव और पुलिस महानिदेशक को सौंपी। इसमें कहा गया है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा का सबसे बुरा असर जनजातीय महिलाओं और युवाओं पर पड़ा है।
आयोग ने सुझाव दिया है कि जनजातीय लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए ढांचागत सुधारों की तत्काल आवश्यकता है। आयोग ने शिकायतों की जांच का काम पुलिस की बजाए किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की सिफारिश को ताकि हिंसा पीड़ित लोगों का संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास बहाल किया जा सके। आकाशवाणी ने इस बारे में आयोग के सदस्य अनन्त नाइक से बातचीत की।
बंगाल सरकार को अपना कमीशन की तरफ से भेज दिये हैं कुछ तो ऐक्शन लेने के लिए। वहां पर जो ट्रायबल के ऊपर हमला हुआ है। पुलिस जो कार्रवाई नहीं कर रही है उसको करना चाहिए। और उसके साथ-साथ जहां पर मकान जलाया गया है और जितना डैमेज हुआ है उसको कंपनसेशन भी मिलना चाहिए। पुलिस की तरफ से उसको जाकर के ट्रायवल का कोई इन्क्वायरी करना चाहिए। उसके ऊपर कुछ लगाना चाहिए। हमारा रिपोर्ट यह है उसका बंगाल से ऊपर असर करेगा। और फिर भी जैसे संविधान का अधिकार विषय है जो कमीशन को मिला है। हमलोग जो ऑब्जर्वेशन किये हैं और जो रिपोर्ट दिये हैं, नहीं करेगा तो फिर प्रशासन के साथ बात करेंगे। हम रिपोर्ट बंगाल सरकार को दिये हैं। राष्ट्रपति को भी देंगे।
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