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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नई दिल्ली में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह की पहली बैठक 2026 की मेजबानी की

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने नई दिल्ली में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह की पहली बैठक 2026 के अंतर्गत आयोजित प्रथम स्वास्थ्य कार्य समूह (एचडब्ल्यूजी) की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रतिनिधि सार्वजनिक स्वास्थ्य में सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए।

2026 में ब्रिक्स अध्यक्षता करते हुए, भारत “लचीलापन, नवाचार, सहयोग एवं स्थिरता के लिए निर्माण” के व्यापक विषय से निर्देशित है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2025 रियो शिखर सम्मेलन में व्यक्त किए गए जन-केंद्रित एवं मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह विषय उत्तरदायी, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार सहयोगी संरचना को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अपने उद्घाटन टिप्पणी में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने सभी ब्रिक्स सदस्य देशों का स्वागत किया और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य कार्य समूह के महत्व को प्रमुख मंच के रूप में रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह की बैठकों ने संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों सहित स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों से निपटने, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने एवं सस्ती दवाओं तक पहुंच में सुधार लाने के लिए सहयोग का मार्ग प्रशस्त किया है। इन प्रयासों से महामारी की तैयारी, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी नवाचार एवं सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने में सहयोग को मजबूती प्राप्त हुई है।

अपने 2026 अध्यक्षता के अंतर्गत भारत की प्राथमिकताओं की बात करते हुए, उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कार्य समूह का उद्देश्य समावेशी, स्थायी एवं साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सहयोग को बढ़ावा देना है, जबकि ब्रिक्स देशों की विविध स्वास्थ्य प्रणालियों और सामाजिक-आर्थिक संदर्भों को मान्यता प्रदान करना भी है। उन्होंने अनुकूलन क्षमता, आपसी सीख एवं सामूहिक विशेषज्ञता का लाभ उठाने की महत्वता पर बल दिया ताकि व्यापक और प्रभावशाली स्वास्थ्य मध्यवर्तन डिजाइन किए जा सके।

सचिव ने यह भी कहा कि लगातार होने वाली ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठकें एवं घोषणाएं लगातार इस महत्व दर्शाती रही हैं कि सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना, स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करन, और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों का प्रभावी तरीके से निपटने में सक्षम लचीली स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियां बहुत आवश्यक है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि संयुक्त अनुसंधान एवं विकास में सहयोग, वैक्सीन और औषधियों तक समान पहुंच,और क्षमता विकास पहल में सुधार करने की आवश्यकता है।

मौजूदा प्राथमिकताओं के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने भारत की अध्यक्षता में दो नए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का प्रस्ताव रखा:

  • ब्रिक्स मिशन फॉर हेल्दी लाइफस्टाइल्सजिसका उद्देश्य स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा देना एवं अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का सेवन और शराब के हानिकारक उपयोग जैसे प्रमुख जोखिम कारकों को संबोधित करना है; और
  • मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देना, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, कलंक को समाप्त करना एवं मानसिक स्वास्थ्य को व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संरचना में एकीकृत करना शामिल है।

उन्होंने जैव विविधता एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर आधारित साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा पर भारत के दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया, जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज एवं सतत विकास में एक मूल्यवान योगदानकर्ता है। उन्होंने इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

बहुपक्षवाद एवं साझेदारी के महत्व को दोहराते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने आशा व्यक्त किया कि स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं से ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग मजबूत होगा और आपसी समझ गहरी होगी। उन्होंने सभी प्रतिनिधिमंडलों को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए साझा प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में परिवर्तित करने की दिशा में सक्रिय रूप से शामिल होने और योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

बैठक में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह के अंतर्गत पहचाने गए नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर भी विचार-विमर्श किया गया, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इनमें शामिल हैं: (i) ब्रिक्स टीबी अनुसंधान नेटवर्क; (ii) ब्रिक्स चिकित्सा उत्पाद नियामक प्राधिकरणों के बीच सहयोग; (iii) बड़े पैमाने पर संक्रामक रोगों की रोकथाम एवं प्रतिक्रिया के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली; (iv) दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य देखभाल सहित निरंतर देखभाल के लिए डिजिटल स्वास्थ्य वास्तुकला; (v) स्वस्थ जीवन शैली के लिए ब्रिक्स मिशन; (vi) मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देना; (vii) पारंपरिक, पूरक एवं एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम); (viii) स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों से प्रेरित बीमारियों के खिलाफ लड़ाई (डीडीएसडीएच); और (ix) राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों का ब्रिक्स नेटवर्क।

इन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, नियामक सामंजस्य, डिजिटल स्वास्थ्य और समान स्वास्थ्य सेवा वितरण में सहयोग को मजबूत करना है, साथ ही ब्रिक्स देशों के बीच सामूहिक तैयारी एवं लचीलेपन को सुदृढ़ करना है।

सदस्य देशों ने भारत के नेतृत्व, नवाचार, सहयोग एवं स्थिरता के माध्यम से लचीलापन निर्माण के साझा विषय का स्वागत किया। ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया ने स्वस्थ जीवन शैली और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की नई प्राथमिकताओं के साथ-साथ पारंपरिक, पूरक एवं एकीकृत चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में शामिल करने के लिए दृढ़ समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने ब्रिक्स टीबी रिसर्च नेटवर्क के माध्यम से टीबी पर सहयोग को प्रगाढ़ करने, संक्रामक रोगों के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, पहुंच में सुधार के लिए डिजिटल स्वास्थ्य संरचनाओं को बढ़ाने (विशेष रूप से दूरस्थ एवं कमजोर समुदायों में), और नियामक सहयोग, दवाओं एवं टीकों के स्थानीय उत्पादन को आगे बढ़ाने पर बल दिया। विभिन्न देशों ने अपने बयानों में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, सामाजिक रूप से निर्धारित बीमारियों एवं स्वास्थ्य के व्यापक सामाजिक निर्धारकों को संबोधित करने और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों तक निष्पक्ष पहुंच सुनिश्चित करने को साझा लक्ष्यों की प्राप्ति की बात की।

यह बैठक प्राथमिकता वाले लक्ष्यों पर आम सहमति, तकनीकी बैठकों एवं ब्रिक्स स्वास्थ्य ट्रैक 2026 के अंतर्गत मंत्रिस्तरीय चर्चाओं सहित आगामी गतिविधियों के लिए एक रोडमैप के साथ समाप्त हुई।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ब्रिक्स एजेंडा को आगे बढ़ाने तथा साझेदारी, नवाचार एवं साझा जिम्मेदारी के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में सार्थक योगदान देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।

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