भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण-(FSSAI) आई ने पहली बार बासमती चावल के लिए व्यापक नियामक मानक अधिसूचित किये हैं। ये मानक इस साल पहली अगस्त से लागू हो जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इसका उद्देश्य बासमती चावल के व्यापार में उचित व्यवहार और घरेलू और वैश्विक-स्तर पर उपभोक्ता हितों की रक्षा करना है।
इन मानकों के अनुसार बासमती चावल में प्राकृतिक सुगंध होनी चाहिए और यह कृत्रिम रंगों, पॉलिशिंग एजेंटों और कृत्रिम सुगंधों से मुक्त होना चाहिए।
मानकों के तहत बासमती चावल की गुणवत्ता भी तय की गई है जिसके तहत उसका औसत आकार, नमी और यूरिक एसिड की अधिकतम सीमा तथा खराब होने की स्थिति शामिल है।
बासमती चावल भारतीय उप-महाद्वीप के हिमालयी क्षेत्र की तलहटी में उगाए जाने वाले चावल की एक उन्नत किस्म है जिसकी घरेलू और विश्व-स्तर पर व्यापक खपत होती है। बासमती चावल वैश्विक आपूर्ति में भारत का दो तिहाई हिस्सा है।