डीआरडीओ ने पीपीई और अन्य सामग्रियों को कीटाणुरहित करने के लिए अल्ट्रा स्वच्छ यूनिट विकसित किया

kitanu rahit davai

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों, कपड़े सहित विभिन्न प्रकार की सामग्रियों को कीटाणुरहित करने के लिए अल्ट्रा स्वच्छ नामक एक कीटाणुशोधन यूनिट विकसित किया है। स उत्पाद को इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस), डीआरडीओ की दिल्ली स्थित प्रयोगशाला, ने अपने औद्योगिक पार्टनर, मेसर्स जेल क्राफ्ट हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, गाजियाबाद के साथ मिलकर विकसित किया है। इस प्रणाली में एक उन्नत ऑक्सीडेटिव प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है, जिसमें कीटाणुशोधन के लिए कई अवरोध विघटन पद्धतियों को शामिल करके ओज़ोनेटेड स्पेस टेक्नोलॉजी का…

Read More

इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी) के वैज्ञानिकों ने घावों के लिए हर्बल दवा वाली स्मार्ट बैंडेज विकसित की

IASST

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीनस्वायत्त संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी स्मार्ट बैंडेज विकसित की है, जो घाव तक दवा की सही डोज पहुंचाकर उसे ठीक कर सकती है। यह स्मार्ट बैंडेज घाव में संक्रमण की स्थिति के अनुरुप उसके पीएच स्तर को देखते हुए दवा की डोज जारी करती है। बैंडेज को नैनोटेक्नोलॉजी आधारित सूती पैच से बनाया गया है​, जिसमें कपास और जूट जैसी टिकाऊ और सस्ती सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। आईएएसएसटी के एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर देवाशीष…

Read More

राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं और विश्वविद्यालयों में कोविड जांच केन्द्रों (हब और स्पोक मॉडल) की संख्या में बढ़ोतरी

kovid janch kendre

देशभर में जांच में तेजी लाने और जांच की पहुंच का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से, देशभर के सरकारी संस्थानों में कोविड -19 के नमूनों की जांच को बढ़ाने के लिए हब और स्पोक मॉडल के आधार पर शहरी / क्षेत्रीय क्लस्टर स्थापित किये गये हैं।  वे संस्थान एवं प्रयोगशालाएं, जिनके पास नमूनों के संग्रह, उनके संभालने / प्रसंस्करण (बीएसएल -2 सुविधा) तथा परीक्षण (आरटी-पीसीआर), दोनों की क्षमता और विशेषज्ञता है, हब के रूप में काम करते हैं और उनके विस्तारित जांच सुविधाओं के रूप में, कई ऐसी प्रयोगशालाएं शामिल हैं जो आरटी –…

Read More

टीके के विकास और दवाओं के परीक्षण के लिए सीसीएमबी में कोरोना वायरस कल्चर

corona virous culture

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला आणविक जीवविज्ञान केन्द्र (सीसीएमबी) के वैज्ञानिकों ने मरीजों के नमूने से कोविड-19 के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) का स्थिर संवर्धन (कल्चर) किया है। लैब में वायरस के संवर्धन की क्षमता से सीसीएमबी के वैज्ञानिकों को कोविड-19 से लड़ने के लिए टीका विकसित करने और संभावित दवाओं के परीक्षण में मदद मिल सकती है। वैज्ञानिक जब वायरस कल्चर करते हैं, तो यह स्थिर होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि वायरस संवर्धन निरंतर होते रहना चाहिए। इसीलिए, इसे स्थिर संवर्धन कहा जाता है। नोवेल कोरोना…

Read More