कोविड-19 न केवल लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि रोगियों और उनके परिवार के सदस्यों के मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। शारीरिक उपचार के साथ मनोवैज्ञानिक देखभाल के महत्व और आवश्यकता को महसूस करते हुए, तीन प्रमुख संस्थानों ने मिलकर कोविड-19 मरीजों के मनोसामाजिक पुनर्वास के लिए एक प्रोटोकॉल विकसित किया है। ये 3 प्रतिष्ठित संस्थान हैं: आयुष मंत्रालय का स्वायत्त निकाय, केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरवाईएन), राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (एनआईएमएचएएनएस), बेंगलुरु और स्वामी…
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आयुष मंत्रालय ने कोविड-19 पर नए दिशानिर्देश जारी किए
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के पैदा होने के बाद नए दिशानिर्देशों की जरूरत पर प्रतिक्रिया देते हुए आयुष मंत्रालय ने आज आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह दिशानिर्देश कोविड-19 महामारी के दौरान खुद से देखभाल को लेकर होम आइसोलेशन वाले कोविड-19 मरीजों और आयुर्वेद एवं यूनानी निवारक उपायों के लिए हैं। यह मुख्य रूप से कोविड-19 के खुद से देखभाल और घरेलू प्रबंधन पर केंद्रित है। देश में कोविड प्रभावित परिवारों के विशाल बहुमत को अस्पतालों से बाहर इस महामारी से निपटने के…
Read Moreभारत में लगातार तीसरे दिन कोविड-19 के 90,000 से अधिक रोगी हुए ठीक
भारत का राष्ट्रीय रिकवरी दर 80% के पार पहुंच गया है। तेजी से मरीजों के रिकवरी होने के कारण भारत में लगातार तीसरे दिन कोविड-19 के 90,000 से अधिक रोगी ठीक हुए हैं। पिछले 24 घंटों में 93,356 मरीजों को छुट्टी दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज ‘संडे संवाद’ कार्यक्रम के ज़रिये अपने सोशल मीडिया फॉलोवर्स से बातचीत की और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। डॉ. हर्षवर्धन से पूछे गए सवालों में न केवल कोविड की वर्तमान स्थिति के बारे में चर्चा हुई, बल्कि इस सम्बन्ध में सरकार के दृष्टिकोण के बारे…
Read Moreपोषण माह मनाए जाने के दौरान ‘आयुष आधारित पोषण उपायों’ पर प्रकाश डाला जाएगा
इसके साथ ही इस दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करने पर भी फोकस किया जाएगा। पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) दरअसल समग्र पोषण के लिए प्रधानमंत्री की व्यापक योजना है, जिसका शुभारंभ उन्होंने 8 मार्च, 2018 को किया था। इस कार्यक्रम में बच्चों का कद न बढ़ने, अल्प-पोषण और जन्म के समय वजन कम रहने की समस्या में कमी लाने और किशोर लड़कियों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं एवं बच्चों में एनीमिया (रक्त की कमी) की समस्या को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। भारत की सभी पारंपरिक चिकित्सा…
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