सरकार ने लोगों से आग्रह किया है कि वे कोरोना के कारण अनाथ और संकटग्रस्त बच्चों के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी का आदान प्रदान न करें क्योंकि इससे उन बच्चों के जीवन को खतरा हो सकता है। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह की जानकारी चाईल्ड लाइन 1098 पर दी जानी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों को गैर कानूनी ढंग से गोद लेने के मामलों पर चिंता व्यक्त की थी। न्यायालय ने राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस तरह के गैरकानूनी गोद लेने के काम में लिप्त संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
अनाथ बच्चों को गोद लेने के लिए लोगों को आमंत्रित करना गैर कानूनी कृत्य है क्योंकि इसके लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण को शामिल करना अनिवार्य है।
कोविड 19 से माता-पिता के संक्रमित होने या उनके अस्पताल में भर्ती होने से बच्चों के सामने गंभीर संकट पैदा हो रहा है। इस महामारी ने तो कई बच्चों को अनाथ भी कर दिया हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे बच्चों की पहचान करें, जिन्होंने पिछले साल मार्च के बाद कोविड या किसी अन्य कारण से अपने माता-पिता को खो दिया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि ऐसे बच्चों की पहचान चाइल्ड-लाइन, स्वास्थ्य अधिकारियों, पंचायती राज संस्थानों, पुलिस या गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से की जा सकती है। इसके अलावा यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी भी बच्चे के माता-पिता की मृत्यु की सूचना मिलने पर, जिला बाल संरक्षण इकाइयों को प्रभावित बच्चे और उसके अभिभावक से तत्काल संपर्क करना चाहिए। बच्चे की देखभाल करने के लिए, उसकी इच्छा के आधार आकलन किया जाना चाहिए। अगर संभव नहीं हो तो बच्चे को तुरंत बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।