C-DOT और CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए NAVIC आधारित आईएसटी ट्रेस करने योग्य प्राथमिक संदर्भ समय घड़ी के विकास के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

C-DOT और CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए NAVIC आधारित आईएसटी ट्रेस करने योग्य प्राथमिक संदर्भ समय घड़ी के विकास के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

दूरसंचार विभाग (डीओटी) के प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (सी-डीओटी) और सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) ने दूर संचार क्षेत्र के लिए ‘एनएवीआईसी आधारित आईएसटी ट्रेसेबल प्राथमिक संदर्भ समय घड़ी (पीआरटीसी) के विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते पर हस्ताक्षर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में किफायती ब्रॉडबैंड और मोबाइल सेवाओं को सक्षम करने के लिए प्रौद्योगिकी डिजाइन, विकास, दूरसंचार उत्पादों के व्यावसायीकरण और समाधान में शामिल घरेलू कंपनियों और संस्थानों को वित्त पोषण सहायता प्रदान करने के लिए दूरसंचार विभाग की दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीटीडीएफ) योजना के तहत किए गए हैं।

यह परियोजना एक ऐसे उपकरण के विकास पर केंद्रित है जो ± 20 एनएस के भीतर सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) को सीधे भारतीय मानक समय (आईएसटी) ट्रेसबिलिटी प्रदान करेगा। इससे भारत को जीपीएस पर निर्भरता कम करने, आईआरएनएसएस/एनएवीआईसी पर स्विच करने, लेनदेन के डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण, साइबर सुरक्षित नेटवर्क, कॉल ड्रॉप को कम करने और सभी दूरसंचार सेवाओं को सीएसआईआर-एनपीएल द्वारा विकसित एक संदर्भ समय स्रोत आईएसटी के साथ सिंक्रनाइज़ेशन से लेकर कई तरीकों से लाभ होगा।

दूरसंचार नेटवर्क का समय सिंक्रनाइज़ेशन एक मजबूत साइबर सुरक्षित राष्ट्र की नींव होगी, क्योंकि प्रत्येक बैंक लेनदेन, शेयर बाजार लेनदेन और सूचना का आदान-प्रदान टीएसपी और आईएसपी के माध्यम से होता है। एनएवीआईसी आधारित आईएसटी ट्रेसेबल प्रारंभिक संदर्भ समय घड़ी (पीआरटीसी) का विकास एक ऐसी पहल है जिसका उद्देश्य “एक राष्ट्र एक समय” के लक्ष्य को हासिल करना है।

सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने इस समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में हमारे देश की समृद्धि और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए भविष्य के अभिनव समाधान विकसित करने में भारतीय अनुसंधान एवं विकास की जबरदस्त क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने “आत्मनिर्भर भारत” की सोच को साकार करने के लिए संयुक्त हित के अन्य क्षेत्रों में सहयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशीष अग्रवाल और डॉ. के.के. मौर्य के साथ-साथ एनपीएल के अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक भी उपस्थित थे। समझौते पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान सी-डॉट के निदेशक डॉ. पंकज कुमार दलेला और शिखा श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

सी-डॉट और सीएसआईआर-एनपीएल दोनों ने अपना उत्साह व्यक्त किया और इस भागीदारी को शानदार सफलता के साथ आगे ले जाने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।

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