संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि विश्व में जलवायु के बारे में किए जा रहे प्रयास पृथ्वी के तापमान में वृद्धि को एक दशमलव पांच डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपर्याप्त है। तापमान वृद्धि के कारण परिस्थितियां और भयानक हो जायेंगी क्योंकि बाढ, लू और तूफान से पहले ही काफी नुकसान हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संगठन के अनुसार करीब दो सौ देशों के संयुक्त प्रयासों से पृथ्वी का तापमान इस शताब्दी के अंत तक करीब दो दशमलव पांच सेल्सियस बढने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु विशेषज्ञों ने बताया है कि 2015 के पेरिस समझौते में निर्धारित एक दशमलव पांच डिग्री सेल्सियस की तापमान वृद्धि का लक्ष्य हासिल करने के लिए उत्सर्जन का स्तर घटाकर 2010 के मुकाबले 2030 में 45 प्रतिशत कम करना पडेगा।
