आज का अखबार 19 सितंबर 2022, सुर्खियों में खबरें

आज का अखबार 19 सितंबर 2022, सुर्खियों में खबरें

जम्‍मू-कश्‍मीर में तीस साल बाद घाटी के लोग सिनेमा घरों में फिल्‍मों का आनंद ले सकेंगे, दैनिक जागरण की पहली खबर है। पत्र आगे लिखता है- मिशन यूथ के अंतर्गत जम्‍मू-कश्‍मीर के प्रत्‍येक जिलें में बनेगा सिनेमा हॉल। नवभारत टाइम्‍स ने इसे सुर्खी दी है- घाटी में फिर आए दिन बहार के।

राष्‍ट्रीय अन्‍वेषण अभिकरण द्वारा पी.एफ.आई. से जुड़े चालीस परिसरों पर छापे मारे जाने को जनसत्‍ता ने पहली खबर बनाया है। बेसमेंट में पार्किंग कर सकते हैं, पढ़ार्इ नहीं। दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय का यह महत्‍वपूर्ण फैसला हिन्‍दुस्‍तान में है। पत्र के अनुसार शिक्षण संस्‍थानों में जगह की कमी के चलते बेसमेंट के इस्‍तेमाल को लेकर उच्‍च न्‍यायालय का यह फैसला आया है। करीब 70 साल तक ब्रिटेन की महारानी रही एलिजाबेथ द्व‍ितीय के आज राजकीय सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार होने पर अमर उजाला ने लिखा है- एक युग के अंत के गवाह होंगे खास और आम। चंड़ीगढ़ विश्‍वविद्यालय के हॉस्‍टल में छात्राओं के एम.एम.एस. पर हंगामे की खबरें सभी अखबारों में है, हिन्‍दुस्‍तान ने पुलिस के हवाले से लिखा है-एस.आर्इ.टी. करेगी मामले की जांच। भारत में भी गूगल फेसबुक के एकाधिकार पर लगाम की तैयारी, अमर उजाला की खबर है- पत्र ने इसे शिकंजा शीर्षक देते हुए लिखा है- आईटी मंत्रालय गैर-प्रतिस्‍पर्धी व्‍यवहार के खिलाफ कदम उठाने पर तेजी से कर रहा काम। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को भेंट किए गए उपहारों की नीलामी पर राष्‍ट्रीय सहारा ने लिखा है कि एनसीसी के पूर्व कैडेट का कार्ड और शतरंज ओलिंपियाड के शुभंकर की प्रति‍मा की भारी डिमांड। पत्र के अनुसार दो अक्‍तूबर तक चलेगी ऑनलाइन नीलामी। मॉनसून की विदाई अगले दो-तीन दिन में। राजस्‍थान पत्रिका सहित सभी अखबारों में है। पत्र के अनुसार दिल्‍ली, उत्‍तर प्रदेश और बिहार में कम बारिश हुर्इ।

ताईबान में आए विनाशकारी भूकंप से इमारतें गिरी, सड़कें टूटी, जापान में सुनामी एलर्ट। राष्‍ट्रीय सहारा सहित लगभग सभी अखबारों में है। नामीबिया से आए आठ मेहमान चीतो के उछल-कूद को राजस्‍थान पत्रिका ने सचित्र देते हुए सुर्खी बनाई है- कि सक्रिय हुए मेहमान चीते आपस में खेलते हुए भी दिखे। राजस्‍थान पत्रिका की यह खबर ध्‍यान खीचती है-देश के सौ जेलो में कैदियों के लिए खोले पुस्‍तकालय। पत्र लिखता है- हिन्‍दुस्‍तानी जुब़ान से देश को एक सूत्र में पिरोना चाहते थे महात्‍मा गांधी, महाराष्‍ट्र के अलावा राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश जैसे कई राज्‍यों में ये पुस्‍तकालय खोले जा चुके हैं।

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