सरकार ने आज कहा कि डॉलर की तुलना में रूपये के कमजोर होने के पीछे रूस-यूक्रेन संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमते, खराब वैश्विक वित्तीय स्थितियों सहित कई वैश्विक कारण है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और यूरो जैसी अन्य मुद्राएं डॉलर के मुकाबले रूपये की तुलना में अधिक कमजोर हुई है।
रूपये को मजबूत करने के उपायों के बारे में उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने हाल के महीनों में ब्याज दरों में वृद्धि की है जिससे देश में और प्रवासी भारतीयों में रूपये का आकर्षण बढ़ा है। श्री चौधरी ने कहा कि रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार पर लगातार नजर रखता है और अत्यधिक उतार-चढ़ाव की स्थिति में हस्तक्षेप भी करता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रूपये के अवमूल्यन से निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है जिससे अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मुद्रा के अवमूल्यन से आयात की लागत भी बढ़ जाती है।