गेहूं और सरसों के लिए किसानों को उत्‍पादन लागत से अधिक फायदा होने का अनुमान

सरकार ने कहा है कि 2022-23 रबी विपणन सत्र के लिए निर्दिष्‍ट रबी फसलों का समर्थन मूल्‍य उत्‍पादन लागत के डेढ गुणा के बराबर या उससे अधि‍क है। कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने नई दिल्‍ली में संवाददाताओं को बताया कि गेहूं और सरसों के लिए किसानों को उत्‍पादन लागत से अधिक फायदा होने का अनुमान है। उन्‍होंने कहा कि इन दोनों फसलों पर उन्‍हें शत-प्रतिशत लाभ मिलता है। संजय अग्रवाल ने कहा कि मसूर पर 79 प्रतिशत और चने पर 74 प्रतिशत फायदा होने का अनुमान है। कृषि सचिव ने बताया कि इस महीने की आठ तारीख को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति‍ ने 2022-23 के रबी विपणन सत्र के लिए रबी फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में वृद्धि की मंजूरी दी थी। उन्‍होंने बताया कि आमतौर पर रबी सत्र के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य की घोषणा अक्‍टूबर में की जाती है लेकिन पिछले वर्ष 23 सितम्‍बर को इसकी घोषणा कर दी गई थी। इस वर्ष आठ सितम्‍बर को ही न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य की घोषणा कर दी गई।

कृषि सचिव ने बताया कि पिछले वर्ष सात सौ 73 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी। मौजूदा सत्र में 879 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद समर्थन मूल्‍य पर की गई है। इससे लगभग एक सौ तीस लाख किसानों को फायदा होगा। उन्‍होंने बताया कि 2021-22 के रबी विपणन सत्र के लिए लगभग चार सौ 33 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई, जबकि इससे पिछले वर्ष लगभग तीन सौ नब्‍बे लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। जिससे 49 लाख बीस हजार किसानों को लाभ पहुंचा था।

कृषि सचिव ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में समर्थन मूल्‍य पर फसलों की कई गुना अधिक खरीद की गई है। उन्‍होंने यह भी बताया कि केन्‍द्र सरकार ने वर्ष 2021-22 में धान की पराली के प्रबंधन के लिए दो सौ 35 करोड रुपए दिए गए।

एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने बताया कि अच्‍छे मॉनसून को देखते हुए इस बार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक अनाज उत्‍पादन होने की आशा है।

Related posts

Leave a Comment