बांग्लादेश के लोग उन्हें महान भारतीय कमांडरों में से एक मानते हैं जिन्होंने बांग्लादेश के लिए लडाई लडी। लोगों का यह भी मानना है कि मुक्ति वाहिनी के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
बांग्लादेश मुक्ति आन्दोलन की शुरूआत के समय घोष त्रिपुरा में तैनात सीमा सुरक्षा बल की 92वें वी. बटालियन के कमांडरों में से एक थे। उन्होंने कहा था कि वे पाकिस्तानी सेना द्वारा मार्च 1971 में बंगालियों पर किए गए अत्याचार और आतंक से दुखी थे।