190 से अधिक देशों ने प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार करने के लिए ऐतिहासिक जैव विविधता संधि को स्वीकार किया है। मॉन्ट्रियल में संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन कॉप 15 में ये देश 2030 तक पृथ्वी के 30 प्रतिशत हिस्से की रक्षा करने पर सहमत हुए हैं। वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के तहत ये देश वार्षिक तौर पर पांच सौ अरब डॉलर की लागत की हानिकारक सरकारी सब्सिडी की कटौती पर भी सहमत हुए हैं। ये देश उन सब्सिडियों की पहचान करने के लिए भी कृतसंकल्प हैं जो 2025 तक जैव विविधता के लिए हानिकारक हो सकती है। जैव विविधता योजना भारत को कृषि सब्सिडी पर राहत देती है। फ्रेमवर्क भारत को कृषि सब्सिडी और कीटनाशक के प्रयोग को जारी रखने के मामले में राहत देता है। यह भारत की प्राकृतिक कृषि की प्राथमिकता रही है। पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने इसे एक महत्वपूर्ण पल बताया। वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क को पेरिस समझौते के बराबर माना जाता है।
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