हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से तेज वर्षा और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चल रहा है। हमारे संवाददाता ने बताया है कि अनेक मार्गों पर आवागमन बाधित है और बिजली तथा पानी जैसी आवश्यक सेवाओं पर भी असर पडा है।
राजधानी शिमला के कृष्णानगर वार्ड में जहां भूस्खलन हुआ था, वहां से अब तक दो शव बरामद हो चुके हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार लगभग 800 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ एक व्यापक दीर्घकालिक आपदा योजना तैयार कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य में आने वाली आपदाओं के प्रभाव को कम करना है। इस बीच, शिमला के समरहिल के शिव मंदिर क्षेत्र में चल रहे बचाव अभियान में कल एक और शव मिलने से मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ पुलिस और स्थानीय निवासी सक्रिय रूप से राहत और बचाव में लगे हुए हैं। राज्य में चल रहे मॉनसून सीजन के दौरान अब तक भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में कुल 327 लोगों की जान जा चुकी है और 318 लोग घायल हुए हैं, जबकि 38 लोग अभी भी लापता हैं।
इस बीच, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल-एनडीआरएफ ने कहा है कि बल के 14 दल हिमाचल प्रदेश और पंजाब में खोज और बचाव अभियान में लगे हैं। बल ने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में बल के अतिरिक्त 15 दलों को तैयार रखा गया है। एनडीआरएफ ने अब तक 960 से अधिक लोगों को बचाया है। बल ने हिमाचल और पंजाब में 10 हजार 363 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। बाढ़ को देखते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में एनडीआरएफ की 158 टीम पहले से ही तैनात हैं।