सीमा सड़क संगठन- बीआरओ आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में ढांचागत विकास के क्षेत्र में अग्रणी बीआरओ राष्ट्र के लिए अपनी शानदार सेवा के 63 वर्ष पूरे कर रहा है।
बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने बीआरओ के सभी सेवानिवृत्त और वर्तमान कर्मियों को बधाई दी है।
हार, हरा नहीं सकती उस समूह को जो लगातार कोशिशें करता है। सीमा सड़क संगठन लक्ष्य प्राप्ति में लगातार कोशिशे करने के लिए जाना जाता है। सीमांत इलाकों में कठिन परिस्थितियों के बावजूद बनाई गई हर एक सड़क बीआरओ के कभी ना हारने मानने वाले जज्बे और शौर्य की कहानी है। स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर मैं सभी कर्मयोगियों से आह्वान करता हूं कि स्वयं को श्रमेण सर्वम साध्यम इन आदर्श वाक्य के लिए स्वयं को पुनः समर्पित करें और बीआरओ को आसमान से भी ऊपर और क्षितिज के पार तक ले जाने की महारथ हासिल कर राष्ट्र निर्माण में अभूतपूर्व योगदान देते रहें।
राजीव चौधरी ने पिछले वर्ष के दौरान संगठन की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्वी लद्दाख के उमलिंग ला दर्रे पर समुद्र तल से 19 हजार चौबीस फीट की ऊचांई पर सड़क बनाई गयी है, जो अब आधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे ऊंची मोटर वाहन चलाने योग्य सड़क बन गई है।
सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक ने कहा कि बीआरओ की उपलब्धियों ने क्षेत्रीय अखंडता और देश के साथ-साथ भारत के पड़ोस के सबसे दुर्गम क्षेत्रों के कल्याण और प्रगति को सुनिश्चित किया है।
राजीव चौधरी ने संगठन की सभी रैंकों से नए जोश और समर्पण के साथ उत्कृष्टता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
