रिज़र्व बैंक दावारहित जमा धन राशि का पता लगाने के लिए केंद्रीकृत वेब पोर्टल विकसित करेगा

रिज़र्व बैंक ने आज घोषणा की कि वह जनता के लिए दावारहित जमा धन राशि का पता लगाने के लिए एक केंद्रीकृत वेब पोर्टल विकसित करेगा ताकि लाभार्थियों को अपनी जमा राशि वापस पाने में मदद मिल सके। वर्तमान में, जमाकर्ताओं और लाभार्थियों को ऐसी जमा राशि का पता लगाने के लिए कई बैंकों की वेबसाइटों की छानबीन करनी पडती है। दावारहित जमा धन राशि ऐसा खाता है जिसमें जमाकर्ता 10 साल या उससे अधिक समय तक कोई भी निवेश या धन की निकासी या अन्‍य लेन-देन नहीं करता है और इसे निष्क्रिय मान लिया जाता है। हाल ही में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लगभग 35 हजार करोड़ रुपये दावा रहित जमा धन राशि के रूप में रिज़र्व बैंक को हस्तांतरित किए हैं।

रिजर्व बैंक के गवर्नर ने लाइसेंस या किसी अन्य नियामक अनुमोदन प्रक्रिया को आसान और कारगर बनाने के लिए एक और केंद्रीकृत पोर्टल की भी घोषणा की। केंद्रीय बजट 2023-24 की घोषणा के अनुरूप, रिजर्व बैंक एक सुरक्षित वेब डेस्क केंद्रीकृत पोर्टल स्थापित करेगा जो आवेदनों या अनुमोदनों पर निर्णय लेने के लिए समय सीमा रखेगा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इस उपाय से नियामक प्रक्रियाओं में अधिक दक्षता आएगी और व्यापार करने में आसानी होगी।

इसके अलावा, रिजर्व बैंक ने यूपीआई के माध्यम से बैंकों द्वारा पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनों के संचालन की अनुमति देकर यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस- यूपीआई के दायरे का विस्तार करने का भी प्रस्ताव दिया। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने आईएफएससी बैंकिंग यूनिट वाले बैंकों को निवासियों को गैर-वितरित विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों की पेशकश करने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम भारत में विदेशी मुद्रा बाजार को अधिक मजबूत करेगा और इससे निवासियों को उनकी जरूरतें पूरा करने में आसानी होगी।

Related posts

Leave a Comment