संसद के वर्षाकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा में कल विपक्ष के 19 सदस्यों को अभद्र व्यवहार के लिए सप्ताह के शेष दिनों के लिए सदन से निलम्बित कर दिया गया। इसमें तृणमूल कांग्रेस के सात, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से छह, तेलंगाना राष्ट्र समिति से तीन, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से दो और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से एक सदस्य शामिल हैं।
सदन की बैठक तीसरे पहर शुरू हुई तो टीएमसी, आम आदमी पार्टी, वामपंथी, डीएमके सहित विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आकर महंगाई और आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। उपसभापति हरिवंश ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन प्रदर्शनकारी सदस्यों ने उनकी नहीं सुनी। व्यवधान जारी रहने पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी० मुरलीधरन ने सभापति का सम्मान न करने और सदन में अनुशासनहीन व्यवहार के लिए प्रदर्शनकारी सदस्यों को निलम्बित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया। सदन ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया। सभापति ने सदन की बैठक दो बार स्थगित की और आखिरकार दिनभर के लिए बैठक स्थगित करनी पड़ी।
राज्यसभा के नेता पीयूष गोयल ने कहा है कि सदन से 19 विपक्षी सदस्यों को निलंबित करने का निर्णय भारी मन से लिया गया।
बडा खेद है कि कुछ माननीय सांसदों को सदन की कार्यवाही से इस हफ्ते के लिए सस्पेंड करना पडा। सदन में भी और सदन के बाहर भी इस बात को रखा है कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, मंहगाई पर भी सरकार चर्चा करना चाहती है। हम बताना चाहते हैं कि कैसे बडे अहम कदम सरकार ने उठाए, जिससे भारत में बाकी देशों के निष्पद मंहगाई कम रही है। हम आश्वस्त करते हैं कि इस विषय पर चर्चा शेड्यूल होगी, जैसे वित्त मंत्री जी का स्वास्थ्य ठीक हो जाए।
उधर, लोकसभा में भी डी.एम.के., वामपंथी पार्टियों और एनसीपी के सदस्यों ने वाकआउट किया। वे, आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी की दरों में वृद्धि पर चर्चा न कराने के सरकार के रवैये का विरोध कर रहे थे। भोजनावकाश के बाद विपक्षी सदस्य जीएसटी वापस लेने और सदस्यों का निलम्बन रद्द करने की मांग को लेकर अध्यक्ष के आसन के सामने आ गये।