राज्यसभा ने आज सिनेमेटोग्राफ संशोधन विधेयक 2023 पारित कर दिया। इसमें सिनेमेटोग्राफ अधिनियम, 1952 में संशोधन का प्रस्ताव है। विधेयक में आयु के आधार पर कुछ अन्य प्रमाण-पत्र श्रेणियां सम्मिलित की गई है। ‘ए’ या ‘एस’ प्रमाणपत्र वाली फिल्मों को टेलीविजन या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य मीडिया पर प्रदर्शन के लिए एक अलग प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी। इस विधेयक से फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और अनधिकृत प्रदर्शन पर रोक लगेगी। विधेयक के अनुसार अनधिकृत रिकॉर्डिंग का प्रयास भी अपराध होगा।
सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सदन में विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भारतीय फिल्मों की विश्वसनीयता बढ़ी है और देश सबसे अधिक फिल्मों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने ऑस्कर में भारतीय फिल्मों और वृत्तचित्रों की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि फिल्म आरआरआर और वृत्तचित्र एलिफेंट व्हिस्परर्स ने विश्व मंच पर प्रसिद्धि प्राप्त की है। अनुराग ठाकुर ने सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष देश की बढ़ती सॉफ्ट पावर और फिल्म उद्योग के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से फिल्म उद्योग से जुड़े हर व्यक्ति को फायदा होगा। अनुराग ठाकुर ने इस विधेयक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे नकली फिल्म बनाने पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि इससे फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग पर भी रोक लगेगी और लाइसेंस प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
इससे पहले बीजू जनता दल के डॉक्टर प्रशांत नंदा ने विधेयक पर चर्चा की शुरुआत की। डॉ. प्रशांत नंदा ने कहा कि नकली फिल्म बनाने से अर्थव्यवस्था को बहुत हानि हुई है। उन्होंने कहा कि इससे फिल्म उद्योग में नौकरियों और आर्थिक नुकसान हुआ है।