रक्षा मंत्री ने रक्षा लेखा विभाग के 276वें वार्षिक दिवस समारोह के दौरान विभिन्न डिजिटल पहलों का अनावरण किया

रक्षा मंत्री ने रक्षा लेखा विभाग के 276वें वार्षिक दिवस समारोह के दौरान विभिन्न डिजिटल पहलों का अनावरण किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 01 अक्टूबर, 2023 को दिल्ली छावनी में आयोजित रक्षा लेखा विभाग (डीएडी) के 276 वें वार्षिक दिवस समारोह के दौरान कई डिजिटल पहलों की शुरुआत की। इस पहल में रक्षा मंत्रालय के लिए एक एकीकृत रक्षा वित्त डैशबोर्ड ‘सारांश’ – रक्षा मंत्रालय के लिए खातों, बजट और व्यय का सारांश; बिस्वास – बिल सूचना और कार्य विश्लेषण प्रणाली और ई-रक्षा आवास शामिल हैं।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में डीएडी को रक्षा वित्त का संरक्षक बताया और पारदर्शी एवं कुशल प्रणाली के माध्यम से देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में उसके प्रयासों की सराहना की। लेखांकन को किसी व्यक्ति, संगठन और समग्र रूप से राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा: “हमारी इच्छाएँ असीमित हैं, लेकिन उपलब्ध संसाधन सीमित हैं”। उन्होंने अधिकतम उत्पादन प्राप्त करते हुए संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए डीएडी की सराहना की।

यद्यपि राजनाथ सिंह ने कई डिजिटल पहल शुरू करने के लिए डीएडी की सराहना की, उन्होंने विभाग की दक्षता और कार्यप्रणाली को और बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने डीएडी के अधिकारियों से लगातार बदलते समय में उत्पन्न होने वाली जटिलताओं से निपटने के लिए अपनी पेशेवर क्षमताओं को विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने आवश्यकताओं के अनुसार उनसे अनुकूलित प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने और इसे अपनाने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) और भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।

रक्षा मंत्री ने वित्तीय सलाह को डीएडी के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक बताया। उन्होंने उनसे वित्तीय सलाह देते समय दो व्यापक पहलुओं को ध्यान में रखने का आग्रह किया – उपयोगकर्ता एजेंसी की मांग का यथार्थवादी मूल्यांकन और उत्पाद के बाजार की समझ। उन्होंने इस बात पर ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया कि किसी उत्पाद को खरीदने की जरूरत है या नहीं और उसके बराबर या उससे अधिक प्रभावशीलता वाला वैसा ही उत्पाद कहीं और कम कीमत पर उपलब्ध है या नहीं। उन्होंने कहा, यह समझ वित्तीय सलाह की गुणवत्ता को और बढ़ाएगी।

ऐसी समझ विकसित करने के लिए, राजनाथ सिंह ने एक इन-हाउस तंत्र, अनुभवी लोगों की एक स्थायी समिति बनाने का सुझाव दिया जो बाजार की ताकतों पर शोध और अध्ययन कर सके और क्षेत्र के अधिकारियों को उच्च गुणवत्ता वाली बाजार की बुद्धिमतापूर्ण जानकारी प्रदान करा सके। उन्होंने कहा “बड़े बैंक और वित्तीय संस्थान घरेलू आर्थिक बुद्धिमत्ता और अनुसंधान टीम विकसित करते हैं। इसी तर्ज पर, डीएडी को बाजार अनुसंधान और बुद्धिमतापूर्ण जानकारी के लिए एक इन-हाउस टीम विकसित करने की जरूरत है।” रक्षा मंत्री ने बाजार स्थितियों के व्यापक अध्ययन के लिए उद्योग संघों, बिजनेस स्कूलों आदि के साथ सहयोग की भी सिफारिश की।

रक्षा मंत्री ने आंतरिक सतर्कता तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सके और उसकी समीक्षा की जा सके। उन्होंने कहा, इससे न केवल समस्या से जल्द निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि विभाग के प्रति लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि सरकार ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है और डीएडी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि “अगर हम एक विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं, तो हमें आधुनिक हथियारों और उपकरणों के साथ मजबूत सशस्त्र बलों की आवश्यकता होगी। इसलिए, हमारे पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना आवश्यक है। सेवाओं की मांग और उपलब्ध संसाधनों के आवंटन के बीच एक अच्छा संतुलन होना चाहिए।”

रक्षा मंत्री द्वारा शुरू की गई डिजिटल पहल का विवरण नीचे दिया गया है:

सारांश (रक्षा मंत्रालय के लिए खातों, बजट और व्यय का सारांश) की संकलपना और इसका विकास, डेटा विश्लेषण का लाभ उठाकर रक्षा लेखा विभाग में चल रहे विभिन्न आईटी प्रणालियों के विभिन्न डेटाबेस भुगतान, लेखांकन, बजट आदि पर भारत भर में रक्षा वित्तीय डेटा के अधिक सटीक और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करने के उद्देश्य से किया गया है।

यह विश्लेषण उपकरण कई अनुप्रयोगों/डेटा स्रोतों से वित्तीय डेटा को एकीकृत, संकलित, स्वच्छ और मानकीकृत करता है और डैशबोर्ड की विशेषताओं के साथ एक वास्तविक समय व्यापक मंच प्रदान करता है: रुझानों की कल्पना करना, मैट्रिक्स प्रदर्शित करना, प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर ग्राफ़, रिपोर्ट आदि। ‘सारांश’ ‘सभी रक्षा संगठनों के लिए केंद्रीकृत निगरानी और डेटा-संचालित निर्णयों की दिशा में सभी रक्षा व्यय की एक नज़र में दृश्यता के साथ उच्च प्रबंधन के लिए एक पूर्ण डैशबोर्ड के रूप में काम करेगा।

बिस्वास

बिस्वास विभिन्न पीसीडीए/सीडीए के लिए एक डैशबोर्ड के रूप में काम करेगा और प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) पर रिपोर्ट सहित बिल प्रबंधन की संपूर्ण प्रक्रिया प्रवाह की निगरानी और विश्लेषण के उद्देश्य से विभिन्न इन्फोग्राफिक्स प्रदर्शित करेगा। यह नियंत्रक कार्यालय के लिए विभिन्न कार्यालय स्वचालन प्रणालियों के माध्यम से प्राप्त होने वाले आकड़ो के इंटरैक्टिव विज़ुअलाइज़ेशन के साथ, बिल प्रसंस्करण का वास्तविक समय में विस्तृत विश्लेषण प्रदान करता है।

ई-रक्षा आवास

ई-रक्षा आवास एक केंद्रीकृत और व्यापक सॉफ्टवेयर पैकेज है, जिसे रक्षा सेवाओं के भीतर किराए पर लेने योग्य भवनों के लिए समय पर किराया और संबद्ध शुल्क उत्पन्न करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और अनुकूलित करने और सरकारी खातों में किराए और संबद्ध शुल्कों की त्वरित छूट की सुविधा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। यह पैकेज, किराया और संबद्ध शुल्कों जैसे कि बीएसओ, एएओ (बीएसओ), एओ (जीई), पीएओ, पीसीएसडीए/सीएसडीए कार्यालय के सृजन, वसूली और छूट में शामिल सभी हितधारकों के लिए एक एकीकृत ऑनलाइन मंच के रूप में कार्य करता है।

इस अवसर पर, राजनाथ सिंह ने प्रमुख विभाग परियोजनाओं को लागू करने में अनुकरणीय पहल प्रदर्शित करने के लिए पांच दलों को उत्कृष्टता के लिए रक्षा मंत्री पुरस्कार 2023 भी प्रदान किए – प्रशिक्षण पद्धति के नए प्रतिमानों को अपनाने के लिए; रक्षा लेखा विभाग में एसएएस परीक्षाओं के संचालन में कंप्यूटर आधारित परीक्षण (सीबीटी) प्रणालियों का कार्यान्वयन; सारांश रक्षा मंत्रालय डैशबोर्ड का कार्यान्वयन; भारतीय सेना के जेसीओ/अन्य रैंकों के लिए वेतन और भत्ते के प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रव्यापी प्रणाली डॉल्फिन 2.0 का कार्यान्वयन; और विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) के विकास के लिए।

इस आयोजन के अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी, नौसेना स्टाफ प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) रसिका चौबे, रक्षा लेखा महानियंत्रक एसजी दस्तीदार और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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