भारत भविष्‍य में फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान का केंद्र बनेगा: गृह मंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कहा है कि भारत भविष्‍य में फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान का केंद्र बनेगा। उन्‍होंने कहा कि सरकार छह वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों के लिए फोरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाने की योजना बना रही है। उन्‍होंने आज गांधीनगर में राष्‍ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्‍वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में यह बात कही। उन्‍होंने कहा कि सरकार सदियों पुरानी भारतीय दंड संहिता, आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्‍य अधिनियम को संशोधित करके फोरेंसिक जांच को कानूनी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

अमित शाह ने कहा कि फोरेंसिक जांच कानूनी और अनिवार्य होने के बाद गंभीर अपराधों में दोषी ठहराने की दर बढ जाएगी। उन्‍होंने प्रशिक्षित श्रम शक्ति बढाने, अवसंरचना निर्माण और फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को प्रोत्‍साहन देने पर बल दिया।

इस अवसर पर एक हजार से अधिक विद्यार्थियों को स्‍नातकोत्‍तर की उपाधि प्रदान की गई। अमित शाह ने विश्‍वविद्यालय के नये दक्षिणी परिसर का शिलान्‍यास भी किया। उन्‍होंने विश्‍वविद्यालय के अंतर्राष्‍ट्रीय अतिथि गृह में प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर साइबर सुरक्षा, डीएनए फोरेंसिक और अन्‍वेषण तथा फोरेंसिक मनोविज्ञान में तीन उत्‍कृष्‍टता केंद्रों का भी उद्घाटन किया गया। इससे पहले, अमित शाह ने गांधीनगर के कलोल में झील के सौंदर्यीकरण की परियोजना का भूमि पूजन किया।

इस अवसर पर गुजरात उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश अरविंद कुमार, राज्‍य मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी और जीतूभाई वघानी के साथ विदेशी अतिथि भी मौजूद थे।

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