भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा है कि वह प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम कम करने के लिये प्रभावी कार्यक्रम तैयार कर रहा है

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा है कि वह प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम कम करने के लिये प्रभावी कार्यक्रम तैयार कर रहा है

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा है कि वह प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम कम करने के लिये प्रभावी कार्यक्रम तैयार कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉक्टर पीके मिश्रा ने कहा कि भारत आपदा जोखिम में कमी लाने के उपायों को अत्यधिक महत्व देता है और उसने इसके लिये निर्धारित राशि में भी बढ़ोतरी की है।

पीके मिश्रा प्रभावी उपायों के लिये 2015 से 2030 की सेंडाई रुपरेखा की मध्यावधि समीक्षा बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत ने आपदा जोखिम कम करने के उपायों के लिए वित्तीय तंत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि राज्य और स्थानीय सरकारों को इस उद्देश्य से पिछले पांच वर्ष में लगभग 6 अरब डॉलर उपलब्ध कराये गये हैं। यह आपदाओं से निपटने की तैयारी, कार्रवाई और बहाली के लिये दिये जाने वाले 23 अरब डॉलर के संसाधनों के अतिरिक्त है। उन्होंने बताया कि केवल एक दशक में ही भारत में चक्रवात से होने वाली मौत दो प्रतिशत से भी नीचे आ गयी है। पीके मिश्रा ने पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में जी-20 के सदस्य देश आपदा जोखिम कम करने पर कार्यसमूह गठित करने पर सहमत हो गये हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज और भारतीय प्रतिनिधि मंडल के अन्य अधिकारियों ने भी इस आयोजन में भाग लिया।

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