उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि भारत-आसियान संबंध भारत की एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य स्तम्भ है। उन्होंने 19वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में कहा कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सभ्यतागत और सांस्कृतिक तथा आर्थिक क्षेत्र में प्रगाढ़ सम्बन्ध हैं। प्राचीन समय से चले आ रहे ये संबंध आधुनिक समय में आपसी सम्बन्धों के लिए ठोस बुनियाद उपलब्ध कराते हैं।1992 में केन्द्रीय साझेदारी से लेकर 2022 में व्यापक रणनीतिक साझेदार के रूप में दोनों देशों के संबंध इसी आधार पर बने हैं।
आसियान-भारत मैत्री के 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि इन तीन दशकों में सम्पर्क से लेकर जलवायु परिवर्तन तक, सुरक्षा, अतंरिक्ष, शिक्षा, पारिस्थितिकी और प्रौदयोगिकी से लेकर व्यापार तक सहयोग के क्षेत्र में बहुपक्षीय और बहुआयामी वृद्धि हुई है। इससे बेहतर भविष्य की दिशा में दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता का पता चलता है।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि भारत क्षेत्रीय, बहुपक्षीय और वैश्विक क्रम के महत्वपूर्ण स्तम्भ के रूप में आसियान को बहुत महत्व देता है। उन्होंने कहा कि भारत हिन्द-प्रशान्त क्षेत्र की मौजूदा स्थिति में आसियान के केन्द्रीय पक्ष का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारत और आसियान का साझा दृष्टिकोण है।
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भविष्य में अनिश्चित भौगोलिक-राजनीतिक वातावरण को देखते हुए परस्पर रणनीतिक विश्वास प्रगाढ करने के साथ भारत-आसियान सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए व्यापक रणनीतिक साझेदारी मार्ग प्रशस्त करेगी।