प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नीति आयोग की सातवीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केन्द्र में आयोजित की गई इस बैठक का उद्देश्य केन्द्र तथा राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के बीच सहयोग का नया युग शुरू करने के लिए माहौल बनाना था। कोविड महामारी के पश्चात देश के अमृत काल में प्रवेश करने और अगले साल जी-20 की अध्यक्षता भारत को मिलने और इसकी बैठक आयोजित करने के संदर्भ में यह बैठक महत्वपूर्ण है। जुलाई 2019 के बाद शासी परिषद की यह पहली बैठक थी।
बैठक के एजेंडे में फसल विविधीकरण, तिलहन, दलहन और अन्य कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन और नगरीय प्रशासन शामिल थे।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने शुरूआती उद्बोधन में कोविड पश्चात के भारत और भविष्य की बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान केन्द्र और राज्य सरकारों ने आपसी सहयोग किया और टीम इंडिया ने जिस तरह से निर्णय लिए उसके परिणाम स्वरूप भारत दुनिया के देशों के लिए एक आदर्श बन कर उभरा। सुमन बेरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्यों से वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता के एक सौ वर्ष पूरा होने तक राज्यों से एक समग्र दृष्टिकोण के साथ काम करने का आह्वान किया।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परमेश्वरन अय्यर ने कहा कि बैठक के दौरान मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों ने अपने-अपने राज्यों के सर्वश्रेष्ठ कार्यों और प्रक्रियाओं पर प्रस्तुति दी। परमेश्वरन अय्यर ने बताया कि बैठक के दौरान केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति 2020 पर प्रस्तुति दी। विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने राज्यों को जी-20 की बैठक के महत्व के बारे में बताया। केन्द्रीय वाणिज्य उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात की उपयोगिता बताई और राज्यों को निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि बैठक में जी-20 की अध्यक्षता भारत को मिलने तथा जी-20 के मंच पर राज्यों को अपनी प्रगति दिखाने की तैयारियों पर भी जोर दिया गया।