प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज कोच्चि में देश के पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत आई.एन.एस. विक्रांत का कोचीन शिपयार्ड में जलावतरण करेंगे। आई.एन.एस. विक्रांत का डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। आई.एन.एस. विक्रांत अत्याधुनिक तकनीक से युक्त है। ये भारतीय नौसेना के इतिहास में अब तक निर्मित सबसे बड़ा युद्धपोत है।
आई.एन.एस. विक्रांत के नौसेना में शामिल होने के बाद देश के पास अब दो विमान वाहक पोत हो जाएंगे, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा और सुदृढ होगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री औपनिवेशिक अतीत से मुक्त और भारत की समृद्ध समुद्री विरासत के अनुरूप नौसेना के नए चिन्ह का अनावरण भी करेंगे। एक ट्वीट संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के भारत के प्रयासों की दिशा में दो सितम्बर एक ऐतिहासिक दिन है।
आईएनएस विक्रांत देश के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत है। 43 हजार टन के ईस्पात निर्मित इस विशालकाय युद्धपोत को आज भारत के नौसैनिक बेड़े में शामिल किया जाएगा। यह भारत के पहले विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के नाम, शिखा और ध्वज संख्या R11 से ही जाना जाएगा, जिसने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 262 मीटर लंबे और 62 मीटर चौड़े आईएनएस विक्रांत में 28 समुद्री मील की अधिकतम गति और 7500 समुद्री मील की क्षमता है। यह पोत 30 विमानों को संचालित करने में सक्षम है जिसमें लड़ाकू जेट और नौसैनिक हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इस जहाज के बेड़े में शामिल होने के बाद, इसमें फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट के डेक इंटीग्रेशन और एविएशन फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स का परीक्षण किया जाएगा। एक बार जब यह विमानवाहक पोत पूरी तरह से शुरू हो जाएगा तो देश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर एक-एक विमानवाहक पोत तैनात किया जाएगा और इस तरह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत अपनी समुद्री क्षमताओं और उपस्थिति को बढ़ाएगा।