प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज “समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता” विषय पर UNSC की विशेष बैठक की अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज  “समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता” विषय पर UNSC की विशेष बैठक की अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि समुद्र हमारी साझा विरासत का हिस्‍सा है और समुद्री मार्ग अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार की जीवन रेखा हैं। उन्‍होंने कहा कि पृथ्‍वी के भविष्‍य के लिए सागर बहुत महत्‍वपूर्ण हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने आज वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में एक खुली चर्चा की अध्‍यक्षता करते हुए कहा कि इस साझा विरासत को आज कई चुनौतियों का सामना करना पड रहा है क्‍योंकि समुद्री मार्गों का इस्‍तेमाल डकैती और आतंकवाद के लिए भी किया जा रहा है।

समुद्री सीमा को लेकर कई देशों में विवाद भी चल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जलवार्यु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का संबंध भी समुद्री क्षेत्र से है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैध समुद्री व्‍यापार से रोक हटानी चाहिए क्‍योंकि सभी देशों की समृद्धि, सक्रिय समुद्री व्‍यापार पर निर्भर है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्र संबंधी विवादों का समाधान शांतिपूर्वक और अंतर्राष्‍ट्रीय कानूनों के अनुरूप किया जाना चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि परस्‍पर विश्‍वास के लिए यह बहुत महत्‍वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्‍व शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने का यह एकमात्र उपाय है। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और गैर सरकारी तत्‍वों द्वारा उत्‍पन्‍न समुद्री खतरों का सामना सभी देशों को मिलकर करना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने इस संबंध में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत, चक्रवात, त्‍सुनामी और प्रदूषण से संबंधित समुद्री आपदाओं में सबसे पहले कार्रवाई करता रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें समुद्री पर्यावरण और संसाधनों का संरक्षण करना होगा। उन्‍होंने कहा कि सागरों का जलवायु पर सीधा असर पड़ता है इसलिए हमें इन्‍हें प्‍लास्टिक और तेल बिखराव जैसे प्रदूषणों से मुक्‍त करना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिम्‍मेदार समुद्री संपर्क को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यह स्‍पष्‍ट है कि समुद्री व्‍यापार को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण आवश्‍यक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन ढांचागत परियोजनाओं के विकास में देशों की वित्‍तीय संधारणीयता और समावेशन क्षमता को ध्‍यान में रखना आवश्‍यक है।

इस खुली चर्चा का विषय था- समुद्री सुरक्षा बढ़ाना- अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग के लिए महत्‍वपूर्ण। इसमें समुद्री क्षेत्र में अपराधों और असुरक्षा से प्रभावी तरीके से निपटने और सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई।

बैठक में रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमिर पुतिन, राष्‍ट्रपति उहरू केन्‍याता और वियतनाम के प्रधानमंत्री मिन्‍ह चिन्‍ह, कई देशों के विदेश मंत्रियों, संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधियों और प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों ने हिस्‍सा लिया।

भारत के प्रधानमंत्री ने पहली बार संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की खुली चर्चा की अध्‍यक्षता की। इतने उच्‍च स्‍तर पर एक विशेष एजेंडा के रूप में पहली बार समुद्री सुरक्षा पर समग्र रूप से चर्चा की गई।

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