राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि धर्म-धम्म की चेतना शीर्ष भारत में निहित है और मानवता की आधारशिला धर्म में मिलती है। वे भोपाल में आज सातवें अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन से संबंधित समारोह में उद्घाटन भाषण दे रही थीं। राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य नैतिकता पर आधारित पद्धति की सुरक्षा करना और इसे बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश में धर्म का सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है और स्वतंत्रता के बाद सदैव धर्म-धम्म को लोकतांत्रिक पद्धति में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सारनाथ के सभी महत्वपूर्ण चिन्ह देश के सभी लोकतांत्रिक भवनों में स्थापित किए गए हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि गांधी जी ने आदर्श राज्य को राम राज्य का नाम दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह तीन दिन का सम्मेलन विश्व को नई दिशा देगा और मानववाद के विकास में सहायक होगा।