ट्राइफेड ने देशभर में सीप की खेती में जनजातीय समुदाय के उद्यमिता विकास के लिए झारखंड के पुरती एग्रोटेक के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

ट्राइफेड ने देशभर में सीप की खेती में जनजातीय समुदाय के उद्यमिता विकास के लिए झारखंड के पुरती एग्रोटेक के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

झारखंड के मेसर्स पुरती एग्रोटेक के साथ किया गया है। ट्राइफेड ने पुरती एग्रोटेक के श्री बुद्धन सिंह पुरती के साथ एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की मूल निवासी “हो जनजाति” में जन्म लेने वाले श्री बुद्धन सिंह पुरती एक जनजातीय उद्यमी हैं, जिनका सीप अर्थात मोती की खेती को बढ़ावा देने वाला एक अनूठा व्यवसाय है। अन्य जनजातीय उद्यमियों में मोती उगाने की कला को बढ़ावा देने और इस बाजार की क्षमता को अत्यधिक ऊंचे स्तर तक पहुंचाने के लिए, ट्राइफेड ने इस सहयोग के माध्यम से इस अद्वितीय शिल्प के लिए एक व्यापार-उन्मुख उद्यम बनाने और साथ ही इस व्यवसाय को अधिक पेशेवर एवं विकसित करने में पुरती एग्रोटेक के श्री बुद्धन सिंह पुरती की सहायता करने की योजना बनाई है। इस सहयोग के तहत दोनों संगठनों ने जनजातीय समुदाय के समग्र उत्थान की दिशा में संयुक्त रूप से काम करने के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों में भागीदारी की है:

ट्राइफेड और पुरती एग्रोटेक के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

ट्राइफेड, पुरती एग्रोटेक को ट्राइब्स इंडिया के लिए आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी आपूर्तिकर्ता सूची में शामिल करेगा और उससे सीप/मोती खरीदेगा जिसे ट्राइब्स इंडिया बिक्री केन्द्रों और विभिन्न ई-कॉमर्स पोर्टलों के माध्यम से बेचा जाएगा।
बुद्धन सिंह पुरती को टेक फॉर ट्राइबल पहल के तहत मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा और जनजातीय उद्यमियों को मत्स्य पालन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अत्यधिक संख्या में जनजातीय स्वयं सहायता समूहों के साथ इस जानकारी को साझा कर प्रौद्योगिकी और तकनीकी का हस्तांतरण किया जाएगा।
पुरती एग्रोटेक को आगे चलकर वन धन विकास केंद्र समूह के रूप में विकसित किया जा सकता है और सूक्ष्म लघु एवं माध्यम उद्यम मंत्रालय की स्फूर्ति योजना का और अधिक लाभ उठाकर वनोपजों का मूल्यवर्धन और प्रसंस्करण किया जा सकता है।
जहां तालाब उपलब्ध है मत्स्य पालन में लगे वहाँ के वन धन विकास केंद्र समूहों को सीप उगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे एक अतिरिक्त व्यावसायिक गतिविधि के रूप में साथ-साथ किया जा सकता है।
इसके अलावा, झारखंड में 25 वन धन विकास केंद्र समूह विकसित करने की भी योजना है जहां सीप की खेती के लिए इस तरह के मत्स्य पालन व्यवसाय को अंजाम दिया जा सकता है।

सीपों को उगाना और मोतियों का विकास एक स्थायी व्यवसाय है और उन जनजातीय संग्रहकर्ताओं द्वारा आसानी से अपनाया जा सकता है जिनकी आस-पास के जल निकायों अर्थात तालाबों तक आसानी से पहुंच है। ट्राइफेड ने मत्स्य पालन में संलग्न वन धन विकास केंद्र समूहों को चिन्हित कर आगे चलकर उन्हें सीप उगाने के लिए विकसित करने में उनकी सहायता करने की योजना बनाई है।

इन सहयोगों के सफल कार्यान्वयन के साथ, ट्राइफेड जनजातीय लोगों को अपने कौशल को विकसित करने और आय तथा आजीविका के अवसर पैदा करने में सशक्त बनाने की उम्मीद करता है। ऐसी गतिविधियों और अन्य विविध गतिविधियों के माध्यम से, ट्राइफेड देश भर में जनजातीय जीवन और आजीविका के पूर्ण परिवर्तन की दिशा में काम कर रहा है।

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