भारत सरकार जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी, रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन, इंक. (आर एंड आई) द्वारा भारत की दीर्घकालिक सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को ‘बीबीबी’ से बढ़ाकर ‘बीबीबी+’ करने और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए “स्टेबल” आउटलुक बरकरार रखने के निर्णय का स्वागत करती है।
यह इस वर्ष किसी सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा किया गया तीसरा अपग्रेड है, इससे पहले एसएंडपी ने अगस्त 2025 में ‘बीबीबी’ (बीबीबी- से) और मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने मई 2025 में ‘बीबीबी’ (बीबीबी (निम्न) से) अपग्रेड किया था, जिससे विश्व में सर्वाधिक गतिशील और लचीली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत की स्थिति की पुष्टि हुई है।
आज प्रकाशित आर एंड आई की भारत सॉवरेन रेटिंग समीक्षा (लिंक: news_release_cfp_20250919_23993_eng.pdf ) के अनुसार, रेटिंग में यह अपग्रेड दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत की स्थिति द्वारा समर्थित है, जो इसके जनसांख्यिकीय लाभांश, मज़बूत घरेलू मांग और सुदृढ़ सरकारी नीतियों पर आधारित है। आर एंड आई ने अपनी रिपोर्ट में सरकार द्वारा राजकोषीय समेकन में प्रगति को मान्यता दी है, जो कि उच्च विकास के साथ-साथ कर राजस्व में वृद्धि और सब्सिडी के युक्तिकरण, और ऋण के प्रबंधनीय स्तर द्वारा संचालित है। यह भारत की मज़बूत बाह्य स्थिरता पर भी प्रकाश डालता है, जो मामूली चालू खाता घाटा, सेवाओं और प्रेषणों (रेमिटेंस) में स्थिर अधिशेष, कम बाह्य ऋण-से-जीडीपी अनुपात और पर्याप्त विदेशी मुद्रा कवर में परिलक्षित होती है।
एजेंसी ने यह भी कहा कि वित्तीय प्रणाली से जुड़े जोखिम सीमित हैं। एजेंसी ने अपने वक्तव्य में कहा, “सरकार पूंजीगत व्यय बढ़ा रही है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और सब्सिडी में कटौती से कर राजस्व में वृद्धि के कारण वह राजकोषीय घाटे को कम करने में सफल रही है।” एजेंसी ने अमेरिका द्वारा हाल ही में टैरिफ में की गई वृद्धि को एक जोखिम कारक माना, हालांकि, उसने यह भी माना कि भारत की अमेरिकी निर्यात पर सीमित निर्भरता और घरेलू मांग-आधारित विकास मॉडल इस प्रभाव को नियंत्रित कर सकते हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने से राजस्व में कमी आएगी, लेकिन निजी उपभोग को बढ़ावा देकर इस नकारात्मक प्रभाव की कुछ हद तक भरपाई की जा सकेगी।
एजेंसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रशासन की नीतियों की भी प्रशंसा की, जिनका मुख्य उद्देश्य विदेशी विनिर्माताओं को भारत की ओर आकर्षित करना, बुनियादी ढांचे का विकास करना, कारोबारी माहौल में सुधार के लिए कानूनी ढांचे को संस्थागत बनाना, ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यह इस वर्ष एसएंडपी, मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस और आरएंडआई द्वारा भारत को प्राप्त तीसरा क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड है और यह भारत के मज़बूत तथा लचीले वृहद-आर्थिक बुनियादी कारकों और विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन के लिए बढ़ती वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। यह व्याप्त वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं में वैश्विक विश्वास को भी रेखांकित करता है। भारत सरकार राजकोषीय विवेक और वृहद-आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ समावेशी, उच्च-गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियों के माध्यम से इस गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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