कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने आज कोविड प्रबंधन और रणनीति पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। ऑनलाइन आयोजित की गई इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण और नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वी के पॉल मौजूद थे। बैठक में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिवों तथा प्रधान सचिवों, नगर निगम आयुक्तों, जिलाधीशों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
कैबिनेट सचिव ने कल ढाई करोड़ से अधिक टीके लगाने की उपलब्धि हासिल करने के लिए राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को बधाई देते हुए स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, जिला मजिस्ट्रेटों और राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई की कि टीकों की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही टीकाकरण की रफ्तार बनाई रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के बावजूद भी राज्यों को ढील नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोविड मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बैठक के दौरान ग्यारह राज्यों में सेरोटाईप-द्वितीय डेंगू की उभरती चुनौती का उल्लेख किया। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों को शुरूआत में ही मामलों की जांच करनी चाहिए और एक हेल्पलाइन शुरू करनी चाहिए। इसके अलावा जांच किट और दवाईयों की भी उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों को तेजी से जांच और कार्रवाई के लिए जांच दल तैनात करने चाहिए। इसके अलावा बुखार सर्वेक्षण और नियंत्रण के लिए कदम उठाये जाने चाहिए। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि रक्त और प्लेट्लैट्स सहित अन्य तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रक्त कोषों को सतर्क करना चाहिए।
केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि 15 राज्यों के 70 जिलों की स्थिति चिंताजनक है। इनमें से 34 जिलों में संक्रमण दर 10 प्रतिशत से अधिक और 36 में यह पांच से दस प्रतिशत के बीच है। आगामी त्यौहारों को देखते हुए राज्यों को सभी तरह की सावधानी बरतने और भीड़ एकत्र नहीं होने देने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को आपात कोविड पैकेज के अंतर्गत अनुदान जारी कर दिए गए हैं। इसका तेजी से और अधिकतम इस्तेमाल किया जाना चाहिए।