केंद्र ने व्यापार सुगमता और सिले-सिलाये कपड़ों या होज़री की बिना पैकेज या खुली बिक्री में शर्तों के भार को कम करने के लिये विधिक माप विज्ञान (पैकेज में रखी वस्तुयें) नियम, 2011 में संशोधन किया

केंद्र ने व्यापार सुगमता और सिले-सिलाये कपड़ों या होज़री की बिना पैकेज या खुली बिक्री में शर्तों के भार को कम करने के लिये विधिक माप विज्ञान (पैकेज में रखी वस्तुयें) नियम, 2011 में संशोधन किया

उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन उपभोक्ता कार्य विभाग को विभिन्न माध्यमों से यह प्रतिवेदन मिला था कि बिना पैकेज या खोलकर बेचे जाने वाले सिला-सिलाये कपड़ों या होज़री को विधिक माप विज्ञान (पैकेज में रखी वस्तुयें) नियम, 2011 से छूट दी जाये। लिहाजा, उपभोक्ता कार्य विभाग ने विधिक माप विज्ञान (पैकेज में रखी वस्तुयें) (तीसरा संशोधन) नियम, 2022 के जरिये बिना पैकेज या खोलकर बेचे जाने वाले सिला-सिलाये कपड़ों या होज़री को छूट प्रदान कर दी है, ताकि व्यापार करना सुगम हो तथा शर्तों का बोझ कम हो। इसके लिये इन छह घोषणाओं से छूट दी गई हैः

(i) वस्तुओं का आम/जेनेरिक नाम।

(ii) पैकेज में रखी वस्तुओं के बारे में उनकी कुल तादाद को महिला या पुरुष की मानक इकाई या संख्या की इकाइयों के तहत घोषित करना। पैकेज में रखी वस्तुओं की कुल तादाद, उनमें कितने पुरुषों की इकाइयां हैं, कितनी महिलाओं की या कौन कितनी संख्या में है, इसके विषय में घोषणा करना।

(iii) प्रति इकाई बिक्री की कीमत।

(iv) निर्माण या पैकेज में रखने से पूर्व या आयात करने का महीना और वर्ष।

(v) समय के साथ अगर वस्तु उपयोग के लायक नहीं रहती, तो उसके विषय में तिथि, महीना और वर्ष की घोषणा, जिस समय के भीतर उसका उपयोग कर लिया जाये।

(vi) उपभोक्ता सुविधा का नाम और पता।

अब उपभोक्ताओं के लिये केवल चार जरूरी घोषणायें दी जानी हैं, जो इस प्रकार हैं:

निर्माता/मार्केटिंग करने वाले/ब्रांड स्वामी/आयातित उत्पादों के मामले में आयातक सहित मूल देश या निर्माता का नाम और पता।

(ii) उपभोक्ता सुविधा का ई-मेल और फोन नंबर।

(iii) एस, एम, एल, एक्सएल, एक्सएक्सएल और एक्सएक्सएक्सएल जैसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य लिबास के माप संकेतों के साथ सेंटीमीटर या मीटर के रूप में विवरण देना होगा।

(iv) अधिकतम खुदरा मूल्य।

उपभोक्ता कार्य विभाग ने जो अधिसूचना जारी की है, उसका उद्देश्य है उपभोक्ताओं के हितों से समझौता किये बगैर उन्हें जरूरी जानकारी देते हुये उद्योगों के लिये व्यापार को सुगम बनाना और शर्तों के बोझ को कम करना।

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