केंद्र घरेलू कृषि क्षेत्र, पर्यावरण लाभ, आयात निर्भरता को कम करने और विदेशी मुद्रा बचत को ध्यान में रखते हुए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना को बढ़ावा दे रहा है

केंद्र घरेलू कृषि क्षेत्र, पर्यावरण लाभ, आयात निर्भरता को कम करने और विदेशी मुद्रा बचत को ध्यान में रखते हुए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना को बढ़ावा दे रहा है

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने आज (04/04/2022) राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि सरकार घरेलू कृषि क्षेत्र, पर्यावरण लाभ, आयात निर्भरता को कम करने और विदेशी मुद्रा बचत को बढ़ावा देने के व्यापक उद्देश्यों के साथ इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना को बढ़ावा दे रही है। सरकार ने जैव-ईंधन पर राष्ट्रीय नीति-2018 को भी अधिसूचित किया है, जिसमें देश में 2030 तक पेट्रोल में इथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण और डीजल में 5 प्रतिशत बायोडीजल के मिश्रण का सांकेतिक लक्ष्य रखा गया। इथेनॉल की आपूर्ति की उत्साहजनक पहल को देखते हुए अब सरकार ने 2030 की जगह 2025-26 तक पेट्रोल में इथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य को आगे बढ़ाया है।

इथेनॉल उत्पादकों के लाभ के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों में अन्य बातों के साथ-साथ इथेनॉल उत्पादन के लिए कई गन्ना और अनाज आधारित अनाज भट्ठियों (फीडस्टॉक) की अनुमति शामिल है। इसमें अनाज भट्ठियों के हिसाब से लाभकारी इथेनॉल खरीद मूल्य तय करना, निर्बाध उत्पादन के लिए संशोधित उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 की शुरुआत, देश भर में इथेनॉल का भंडारण और संचालन करना शामिल है। इसके साथ ही इथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाने और ईबीपी योजना को बढ़ावा देने के लिए ईबीपी कार्यक्रम के लिए इथेनॉल को 5 प्रतिशत की न्यूनतम जीएसटी स्लैब दर के तहत लाया गया और देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने के लिए 2018, 2019, 2020 और 2021 के दौरान ब्याज में अनुदान योजनाएं शुरू की गईं। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने इसकी कमी वाले राज्यों में समर्पित इथेनॉल संयंत्र स्थापित करने के लिए संभावित परियोजना सहयोगियों के साथ दीर्घकालिक इथेनॉल ऑफ-टेक (खरीदने या बेचने के समझौते) समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

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