राज्यसभा ने आज केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2022 ध्वनिमत से पारित कर दिया है। लोकसभा इस पहले ही पारित कर चुकी थी। इससे केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम-2009 में संशोधन होगा और यह विभिन्न राज्यों में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रावधान करता है। इससे वडोदरा में राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान को गति शक्ति विश्वविद्यालय में परिवर्तित किया जा सकेगा और यह एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होगा। राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान को एक डीम्ड विश्वविद्यालय घोषित किया गया था। विधेयक में यह प्रावधान है कि गति शक्ति विश्वविद्यालय परिवहन, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन से संबंधित विषयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुसंधान और कौशल विकास प्रदान करेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिवहन क्षेत्र अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण आयाम है। उन्होंने कहा कि गति शक्ति मास्टर प्लान के माध्यम से रेलवे, राजमार्ग और जलमार्ग के बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाया जाएगा। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि विश्वविद्यालय का अधिकार क्षेत्र केवल गुजरात तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे देश के लिए है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे ने इस विश्वविद्यालय के लिए 166 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है और साथ ही बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ साल में रेलवे में तीन लाख 50 हजार से ज्यादा भर्तियां की गई हैं।
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के डॉक्टर एल. हनुमंतैया ने कहा कि स्थायी कर्मचारियों की कमी और खराब बुनियादी ढांचे तथा रिक्तियों की स्थिति चिंताजनक है। टीएमसी की डोला सेन ने कहा कि देश भर के अधिकांश केंद्रीय विश्वविद्यालय बुनियादी ढांचे और धन की कमी का सामना करते हैं। उन्होंने इसे अच्छा निर्णय बताया। एनसीपी की वंदना चव्हाण ने भी कानून का समर्थन किया। वाईएसआर कांग्रेस के वी विजयसाई रेड्डी ने रेलवे में लंबित रिक्तियों का मुद्दा उठाया और उन्हें समयबद्ध तरीके से भरने की मांग की। सीपीआई-एम के वी शिवदासन ने केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में शोध फेलोशिप और शिक्षण पदों की रिक्तियों का मुद्दा उठाया। समाजवादी पार्टी के प्रो. राम गोपाल यादव ने गति शक्ति विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए छात्रावास और मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता पर बल दिया। कई अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पर चर्चा की।