उपराष्ट्रपति नायडु ने आज आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में संस्कृति तथा पर्यटन से संबंधित परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की

उपराष्ट्रपति नायडु ने आज आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में संस्कृति तथा पर्यटन से संबंधित परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने आज आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में संस्कृति तथा पर्यटन से संबंधित परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की। पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी के नेतृत्व में पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना राज्यों में परियोजनाओं की प्रगति के बारे में उपराष्ट्रपति को विस्तृत प्रस्तुति दी। उपराष्ट्रपति नायडु ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों की सरकारों के साथ नजदीकी तालमेल बनाकर परियोजनाओं को जल्द पूरा करने का सुझाव दिया।

उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति नायडु ने पिछले महीने भी 28 जुलाई को पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात की थी और उन्हें इन राज्यों में लंबित कार्यों के बारे में जानकारी दी गई थी। उपराष्ट्रपति नायडु आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून, 2014 के तहत स्थापित की जा रही परियोजनाओं और संस्थानों को जल्द से जल्द पूरा करने तथा उन्‍‍हें पूरी तरह से चालू करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों का नियमित रूप से मार्गदर्शन करते रहे हैं।

पर्यटन मंत्रालय की प्रस्तुति के दौरान, अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति नायडु को स्वदेश दर्शन योजना (आंध्र प्रदेश में तटीय सर्किट और बौद्ध सर्किट, तेलंगाना में इको सर्किट, जनजातीय सर्किट और विरासत सर्किट) और प्रसाद योजना के अंतर्गत (आंध्र प्रदेश में अमरावती और श्रीसेलम मंदिर का विकास) पूर्ण हुई परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने इन राज्यों में कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में पर्यटन से संबंधित अन्य परियोजनाओं का विवरण भी दिया।

संस्कृति मंत्रालय की प्रस्तुति के दौरान, अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति नायडु को हजार स्तंभ मंदिर, हनमकोंडा, वीरभद्रेश्वर स्वामी मंदिर, लेपाक्षी, चारमीनार, हैदराबाद में चल रहे प्रमुख संरक्षण कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने संग्रहालयों, प्रदर्शन कलाओं, क्षेत्रीय सांस्कृतिक कें‍द्रों, पुस्तकालयों और अन्य संस्थानों के लिए धन के आवंटन तथा परियोजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया।

उपराष्ट्रपति ने प्रगति के लिए अधिकारियों की सराहना की और उन्हें सलाह दी कि वे परियोजनाओं के स्थल का नियमित रूप से दौरा करें और उनके कार्य में तेजी लाने के लिए व्यक्तिगत पहल करें।

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