‘अमृतकाल’ के आरंभ में आईएनएस विक्रांत को राष्ट्र-सेवा में समर्पित करना सरकार के दृढ़ संकल्प का परिचायक: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

‘अमृतकाल’ के आरंभ में आईएनएस विक्रांत को राष्ट्र-सेवा में समर्पित करना सरकार के दृढ़ संकल्प का परिचायक: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘अमृतकाल’ के आरंभ में आईएनएस विक्रांत को राष्ट्र-सेवा में समर्पित करना सरकार के उस दृढ़ संकल्प का परिचायक है कि सरकार अगले 25 वर्षों में देश की सुरक्षा और संरक्षा को सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा, “आईएनएस विक्रांत आकांक्षी और आत्मनिर्भर ‘नये भारत’ का प्रकाशवान प्रतीक है। वह राष्ट्र के गौरव, शक्ति और संकल्प का प्रतीक है। उसे राष्ट्र-सेवा में समर्पित करना स्वदेशी युद्धपोतों के निर्माण की दिशा में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। भारतीय सेना की परंपरा है कि ‘पुराने जहाज कभी मरते नहीं।’ विक्रांत का यह नया अवतार, जिसने 1971 के युद्ध में शानदार भूमिका निभाई थी, हमारे स्वतंत्रता सेनानियों तथा वीर सैनिकों के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि है।”

राजनाथ सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि लगातार बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच निर्बाध समुद्री व्यापार के लिये देश के समुद्री हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी भारतीय नौसेना के कंधों पर है। उन्होंने नौसेना की प्रशंसा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संकटों के समय नौसेना हमेशा ‘सबसे पहले सक्रिय’ हो जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईएनएस विक्रांत को देश-सेवा में समर्पित करने से नौसेना की क्षमता और बढ़ जायेगी। उन्होंने कहा कि यह मित्र देशों को आश्वासन है कि भारत क्षेत्र की सामूहिक रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा, “हम मुक्त, खुले और समावेशी भारत-प्रशांत में विश्वास करते हैं। इस दिशा में हमारे प्रयास ‘सागर’ (सेक्योरिटी एंड ग्रोथ फ़ॉर ऑल इन दी रीजन) द्वारा निर्देशित है, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री ने की है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएनएस विक्रांत को राष्ट्र-सेवा में समर्पित करना इस बात की पुष्टि है कि सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ को हासिल करने के लिये दृढ़ प्रतिज्ञ है। यह कोई एकाकी नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में होने वाले बड़े बदलावों का महत्वपूर्ण अंग है।

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, व्यापार, यातायात और संचार जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। रक्षा मंत्री ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये रक्षा मंत्रालय द्वारा की गई पहलों के बारे में बताया। इन पहलों के तहत उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा गलियारों की स्थापना; रचनात्मक स्वदेशीकरण सूची को जारी करना; घरेलू उद्योग के लिये 68 प्रतिशत पूंजी खरीद बजट आवंटन; रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति 2020 और एफडीआई सीमा में बढ़ोतरी शामिल है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर दी वर्ल्ड’ तथा पिछले वर्ष हुए 400 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निर्यात, इस परिकल्पना का प्रमाण है।

रक्षा मंत्री ने कहा, “जब भारत पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, तो इसके मद्देनजर वैश्विक व्यापार में हमारा हिस्सा आने वाले दिनों में बढ़ेगा। अगर हमारा हिस्सा बढ़ेगा, तो उसका बड़ा भाग समुद्री मार्गों के जरिये ही होगा। ऐसी परिस्थिति में, आईएनएस विक्रांत हमारी सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिये अहम साबित होगा।”

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