सरकार ने राज्यसभा में मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष के गैर-लोकतांत्रिक व्यवहार को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय बताते हुए विपक्ष से माफी मांगने को कहा है। नई दिल्ली में आज मीडिया से बातचीत में संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि सदन में नियमों का खुलेआम उल्लंघन करने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ कडी और चेतावनीपूर्ण कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इसके सहयोगी दलों ने पहले से तय कर लिया था कि संसद को नहीं चलने दिया जाएगा।
प्रहलाद जोशी ने कहा कि कुछ विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्टर की मेज़ पर चढकर सदन की पवित्रता को धूमिल किया और आसन पर नियम पुस्तक फेंकी तथा मार्शलों के साथ हाथापाई भी की। प्रहलाद जोशी ने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्यों ने धमकी दी कि सरकार और अधिक विधेयक पारित कराने के प्रयास करेगी तो संसद में और अधिक गंभीर परिणाम होंगे।
उन्होंने, शोरशराबे में विधेयकों को पारित कराने के विपक्ष के आरोपों पर सवाल खडे किये। उन्होंने कहा कि सरकार, दोनों सदनों का कामकाज सुचारू रूप से सुनिश्चित कराने के लिए विपक्ष से लगातार संपर्क करता रहा लेकिन वे संसद का कामकाज नहीं चलाने पर अडे़ हुए थे। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि 2004 और 2014 के बीच यूपीए शासन के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक शोरशराबे के बीच पारित कराए गए थे।
केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में नेता सदन पीयूष गोयल ने कहा कि सत्र के पूरे समय के दौरान विपक्ष ने दुर्व्यवहार किया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि जन कल्याण के मुद्दों पर चर्चा की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में विपक्ष का व्यवहार संसदीय लोकतंत्र का नि:कृष्ट या ओछा उदाहरण था।
पीयूष गोयल ने कहा कि विपक्ष का रवैया अत्यंत निंदनीय रहा। उन्होंने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज किया कि सदन में बाहरी लोगों को बुलाया गया था। पीयूष गोयल ने इस घटना की बारीकी से जांच कराए जाने की मांग की और कहा कि दोषी सदस्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष का एकमात्र एजेंडा सडक से संसद तक ‘अराजकता फैलाना’ था। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में महासचिव की मेज, विरोध और नाचने के लिए नहीं थी। संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, भूपेन्द्र यादव, अर्जुनराम मेघवाल और वी. मुरलीधरन भी उपस्थित रहे।