रूस और भारत के वैज्ञानिकों ने एक विषैले जंगली पौधे के बीज से बायोडीजल के उत्पादन में सुधार की विधि विकसित की है। रूसी समाचार एजेंसी स्पूतनिक ने एक अध्ययन के हवाले से बताया है कि इस विधि से श्रम लागत में कटौती होगी और जैव ईंधन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
बायोडीजल एक लंबी श्रृंखला वाला फैटी एसिड मिथाइल एस्टर है जो वनस्पति तेल और पशु वसा से प्राप्त होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोलियम आधारित डीजल ईंधन की तुलना में इसके कई फायदे हैं। साथ ही गैस उत्सर्जन में भी कमी आती है। बायोडीजल के स्तर में सुधार होता है और इसका उपयोग किसी भी डीजल इंजन या मिश्रण में भी किया जा सकता है।
रूस की डॉन स्टेट टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने भारत की यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज देहरादून के सहयोगियों के साथ मिलकर यह अध्ययन किया है।