भारत 2030 तक अपनी बिजली उत्पादन क्षमता का 65 प्रतिशत हिस्सा गैर जीवाश्म ईंधनों से प्राप्त करेगा। नई दिल्ली में आयोजित भारतीय उद्योग परिसंघ के वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए बिजली मंत्री आर. के. सिंह ने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपभोग और प्रति व्यक्ति सबसे कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों में से एक है। उन्होंने कहा कि शून्य कार्बन उत्सर्जन महत्वपूर्ण है लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण ज्यादा बिजली देने की आवश्यकता है, जिससे एक उद्योग स्थापित करने की स्थिति में देश में बिजली की कमी न रहे। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि यह एक चुनौती है। आर. के. सिंह ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढाना एक चुनौती है लेकिन यह एक अवसर भी है, क्योंकि भारत सबसे अधिक ऊर्जा मांगों के साथ सबसे तेजी से विकसित होने वाले देशों में से एक है। आर. के. सिंह ने कहा कि सरकार ने इस क्षेत्र का कायाकल्प किया है और बिजली की कटौती में 17 प्रतिशत कमी आई है। उन्होंने कहा कि सरकार पनबिजली को काफी बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का शुभारंभ किया है क्योंकि देश पर्यावरण में विश्वास करता है।
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