न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ने आपराधिक न्याय प्रणाली को बदलने में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया

न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ने आपराधिक न्याय प्रणाली को बदलने में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ने आपराधिक न्याय प्रणाली को बदलने में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। आज केन्‍द्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो-सीबीआई दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में 20वां डी. पी. कोहली मेमोरियल व्याख्यान देते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने नए जमाने के आपराधिक नेटवर्क से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नई तकनीक अपनाने जोर दिया। उन्होंने कहा, समय की मांग है कि सीबीआई कार्यवाही की जटिलता को पहचाना जाए और देरी से बचने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जाए। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रौद्योगिकी से त्वरित और निष्पक्ष सुनवाई हो सकेगी।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि डिजिटल परिवर्तन के युग में कानून और प्रौद्योगिकी में अपराध का पता लगाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई जैसी कानून और प्रवर्तन एजेंसियों को नई और जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिसके लिए नवीन समाधान की जरूरत है। उन्होंने आपराधिक न्याय प्रणाली में सभी हितधारकों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया। मुख्‍य न्‍यायाधीश ने डिजिटल प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया।

इस अवसर पर, उन्‍होंने सीबीआई अधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक भी प्रदान किये।

केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो की स्थापना भारत सरकार के एक प्रस्ताव द्वारा 1 अप्रैल, 1963 की गई थी। इसका उद्देश्य न केवल रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना है, बल्कि सहायक खुफिया जानकारी एकत्र करने के अलावा केंद्रीय वित्तीय कानूनों के उल्लंघन और गंभीर अपराधों की भी जांच करना है। सीबीआई अपने संस्थापक निदेशक डी पी कोहली को सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वर्ष 2000 से डी. पी. कोहली मेमोरियल व्याख्यान का आयोजन करती आ रही है।

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