विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक ऐसे बहुध्रुवीय विश्व का आह्वान किया है, जिसके केंद्र में सुधारों पर आधारित संयुक्त राष्ट्र हो। डॉ. जयशंकर ने कल शाम युगांडा की राजधानी कंपाला में 19वें गुट-निरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भारत का दृष्टिकोण रखते हुए अधिक क्षेत्रीय उत्पादन के साथ आर्थिक विकेंद्रीकरण पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे सांस्कृतिक पुनर्संतुलन पर भी जोर दिया, जहां सभी विरासतों का परस्पर सम्मान किया जाता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को इस समूह की सदस्यता दिलाकर यह साबित किया कि परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि इस सुधार से बहुपक्षवाद को प्रेरणा मिलनी चाहिए।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि विश्व व्यवस्था को बदलने के लिए व्यावहारिक कदमों को उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र, लचीली आपूर्ति श्रृंखला, पूर्वानुमानित गतिशीलता और विश्वसनीय डेटा के प्रवाह को जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास के लिए खाद्य, ऊर्जा और स्वास्थ्य सुरक्षा से संबंधित मुद्दों का समाधान महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी की संप्रभुता का सम्मान करते हुए कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कहीं भी होने वाले संघर्ष का प्रभाव सब जगह होता है। उन्होंने कहा कि गाजा में संघर्ष एक मानवीय संकट है, जिसके लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता है, जिससे कि सबसे अधिक प्रभावित लोगों को तत्काल राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आतंकवाद और लोगों को बंधक बनाने को किसी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का सम्मान करना चाहिए और यह जरूरी है कि संघर्ष किसी विशेष क्षेत्र या उसके बाहर न फैले। उन्होंने कहा कि दो-देश के समाधान की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए, जहां फिलिस्तीनी लोग सुरक्षित सीमाओं के अंदर रह सकें।