विकसित भारत के निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा, निवेश, नवाचार और समावेशन पर विशेष बल दिया जा रहा है: प्रधानमंत्री मोदी

विकसित भारत के निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा, निवेश, नवाचार और समावेशन पर विशेष बल दिया जा रहा है: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि विकसित भारत के निर्माण के लिए चार मुख्य क्षेत्रों– बुनियादी ढांचा, निवेश, नवाचार और समावेशन पर विशेष बल दिया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि विश्‍व समुदाय, भारत के प्रति विश्‍वास की भावना लिए हुए है और भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखा जा रहा है जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता ला सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसका पूरा लाभ लेने के लिए आवश्‍यक है कि राज्‍य अग्रणी भूमिका निभाएं, गुणवत्‍ता पर ध्‍यान दें और राष्‍ट्र प्रथम की भावना से निर्णय लें। प्रधानमंत्री ने यह बात कल दिल्‍ली में मुख्‍य सचिवों के दूसरे राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन के अंतिम दिन कही। सम्‍मेलन में राज्‍यों के साथ भागीदारी से त्‍वरित और सतर्क आर्थिक वृद्धि का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने पर बल दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि राज्‍यों को विकासोन्‍मुखी शासन, कारोबारी सुगमता, बेहतर जीवन-यापन और सशक्‍त बुनियादी ढांचे पर बल देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने मुख्‍य सचिवों से अनावश्‍यक अनुपालनों और अव्‍यावहारिक नियमों तथा कानूनों को खत्‍म करने पर विशेष ध्‍यान देने की अपील की। उन्‍होंने कहा कि भारत में अभूतपूर्व पैमाने पर सुधार किए जा रहे हैं, इसलिए बहुत अधिक नियमन और अनावश्‍यक प्रतिबंधों की आवश्‍यकता नहीं है।

प्रधानमंत्री ने सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र को सशक्‍त करना जारी रखने की आवश्‍यकता बताई। उन्‍होने कहा कि आत्‍मनिर्भर बनने और आर्थिक वृद्धि को तेज करने के लिए यह आवश्‍यक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्‍थानीय उत्‍पादों को लोकप्रिय बनाना भी समान रूप से महत्‍वपूर्ण है। उन्‍होंने अर्थव्‍यवस्‍था के प्रत्येक क्षेत्र में गुणवत्‍ता के महत्‍व को प्रमुखता से उजागर किया। मुख्‍य सचिवों के सम्‍मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री ने आकांक्षी ब्‍लॉक कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्‍होंने कहा कि इससे उन क्षेत्रों का समग्र विकास संभव होगा जिनके लिए अतिरिक्‍त सहायता की आवश्‍यकता है। इन अविकसित इलाकों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों पर विशेष ध्‍यान दिया जाएगा। इस कार्यक्रम से देश के पांच सौ से अधिक ब्‍लॉक में जीवन-यापन बेहतर होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक ही प्रकार के दस्‍तावेज कई विभागों द्वारा मांगे जाते हैं, इसलिए स्‍व-प्रमाणन को अपनाने और अलग-अलग तरह के फॉर्म का मानकीकरण करने की आवश्यकता है। उन्‍होंने कहा कि देश में भौतिक और सामाजिक-दोनों तरह की अवसंरचना की दिशा में काम चल रहा है और प्रधानमंत्री गतिशक्ति मास्‍टर प्‍लान इसी प्रयोजन से है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आवश्‍यक सेवाओं की अबाध उपलब्‍धता के लिए डेटा सुरक्षा तकनीक को महत्‍वपूर्ण बताया। उन्‍होंने इस बात पर बल दिया कि राज्‍यों को मजबूत साइबर सुरक्षा नीति अपनानी चाहिए और यह निवेश भविष्‍य का बीमा सिद्ध होगा। प्रधानमंत्री ने देश के तटवर्ती इलाकों के विकास की भी चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि देश के विशिष्‍ट आर्थिक जोन में संसाधन और प्रचुर अवसर उपलब्‍ध हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सर्कुलर अर्थव्यवस्‍था के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने इस संबंध में पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली के लिए चलाए जा रहे मिशन लाइफ और इसे कार्यरूप देने में राज्‍यों की महत्‍वपूर्ण भूमिका की भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की पहल पर संयुक्‍त राष्‍ट्र ने 2023 को अंतर्राष्‍ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया है। उन्‍होंने कहा कि मोटे अनाज पर्यावरण के अनुकूल हैं और आगे भी उपलब्‍ध रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्‍यों को मोटे अनाज से जुड़े उत्‍पादों पर अनुसंधान करना चाहिए। उन्‍होंने प्रमुख सार्वजनिक स्‍थलों और राज्‍य सरकार के कार्यालयों में मोटे अनाज वाले कैफे खोलने की आवश्‍यकता बताई। उन्‍होंने यह भी कहा कि राज्‍यों में आयोजित की जा रही जी-20 बैठकों में मोटे अनाजों को प्रमुखता से उजागर किए जाने की आवश्‍यकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्‍यों में जी-20 बैठकों की तैयारियों के लिए आम नागरिकों की सहभागिता ली जानी चाहिए। उन्‍होंने नौकरशाही की क्षमता बढ़ाने की आवश्‍यकता और मिशन कर्मयोगी की शुरूआत की भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्‍य सरकार को अपने प्रशिक्षण ढांचे की समीक्षा करनी चाहिए और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करने चाहिए।

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