रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि भारत अपनी संप्रभुता के साथ समझौता कभी नहीं करेगा। आतंकवाद को अपनी नीति मानने वाले देश अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं होंगे। जम्मू में आज राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवादी और इसके समर्थकों को अब समझ लेना चाहिए कि आतंकवाद भारत को मंजूर नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने क्षेत्र का इस्तेमाल करने से बाज आने को कहा।
भारत आतंकवाद के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति रखता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकी नेटवर्क, आतंक वित्त पोषण, नशीले पदार्थों और हथियारों की आपूर्ति तथा गुप्त आतंकवाद को जम्मू-कश्मीर से खत्म किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने देश में व्यवस्था लाने की जरूरत है न कि अपने क्षेत्र से आतंक का पोषण करने की।
भारत-चीन सीमा पर किसी बडे परिवर्तन से इंकार करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन ने गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच के समझौते का उल्लंघन करने का प्रयास किया। लेकिन भारत के बहादुर सैनिकों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। भारत अपनी सीमाओं पर शांति चाहता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक वार्ता जारी है। भारत अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता पर किसी प्रकार के परिवर्तन से कभी समझौता नहीं करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत विश्व की मानसिकता बदलने में सफल हुआ है। आज विश्व आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है।
पिछले नौ वर्षों में सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा विनिर्माण निर्यात 16,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
समुद्री सुरक्षा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत हिन्द महासागर में निर्विवाद सुरक्षा प्रदाता बन चुका है। भारतीय नौसेना आने वाले दशक में विश्व की शीर्ष तीन शक्तिशाली नौसेनाओं में एक होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना का आधुनिकीकरण किया गया है। आज यह देश को किसी भी खतरे से रक्षा करने में सक्षम है।
