16वां जी-20 शिखर सम्मेलन इटली के रोम में आज शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वैश्विक नेताओं के साथ इस शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। इस वर्ष का शिखर सम्मेलन जनता, ग्रह और समृद्धि के विषय पर केन्द्रित है। शिखर सम्मेलन में आर्थिक और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार, जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास पर जोर दिया जाएगा। सम्मेलन के आज का सत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्वास्थ्य पर था क्योंकि यह कोविड-19 महामारी के मद्देनजर बहुत महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में विभिन्न नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य में सुधार तथा इससे आगे की स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन में भारत प्रौद्योगिकी अंतरण के जरिए नैदानिक और वैक्सीन, आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन घरानों के विविधिकरण समेत कोविड-19 महामारी के नियंत्रण के उपकरणों तक समान और किफायती पहुंच के लिए प्रबल समर्थक है। भारत ने जी-20 शिखर सम्मेलन में कोविड-19 वैक्सीन के प्रमाणन को आपसी मान्यता का भी प्रस्ताव रखा है।
जी-20 शिखर बैठक के समय अन्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, जर्मनी की चांसलर एंजला मर्कल, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस और विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस समेत विभिन्न नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया।
प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने जी-20 शिखर सम्मेलन से अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। दोनों नेताओं की परिणामजनक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि भारत और फ्रांस विभिन्न क्षेत्रों में सघन सहयोग कर रहे हैं। आज की वार्ता से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसेन लूंग के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत और सिंगापुर के बीच मैत्री संबंधों के पूर्ण स्वरूप की समीक्षा की।
शिखर सम्मेलन का कल का सत्र जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण तथा टिकाऊ विकास पर होगा।