प्रधानमंत्री मोदी ने विश्‍व के सबसे बड़े रिवर क्रूज-एमवी गंगा विलास को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया

प्रधानमंत्री मोदी ने विश्‍व के सबसे बड़े रिवर क्रूज-एमवी गंगा विलास को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विश्‍व के सबसे बड़े रिवर क्रूज-एमवी गंगा विलास को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। उन्‍होंने एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की कई अन्य अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में 125 से अधिक नदियां होने के कारण भारत में जलमार्ग परिवहन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। जलमार्ग यातायात का एक सस्‍ता माध्‍यम भी है। उन्‍होंने कहा कि सरकार जलमार्ग के क्षेत्र में विकास कार्य कर रही है। इस विकास कार्य से यातायात, व्‍यापार और पर्यटन को बढावा मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह विकास इंजन के रूप में देश के पूर्वी हिस्‍से को विकसित करने में सहायक होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देश की मूलभूत संरचना के रूपांतरण का दशक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एम वी गंगा विलास की यात्रा एक सामान्‍य यात्रा नहीं है। यह यात्रा देश की अंतर्देशीय जलमार्ग व्‍यवस्‍था में विकास का एक उदाहरण पेश करती है।

पिछले वर्ष इस क्षेत्र की असाधारण विकास को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में देश में केवल पांच जलमार्ग थे और अब ये संख्‍या बढ़कर 111 हो गई है। लगभग दो दर्जन जलमार्ग परिचालित हो रहे हैं और कार्गो की आवाजाही तीन गुना बढ चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि यह देश की यात्रा की एक साक्षी है।

स्विटजरलैंड के पर्यटकों को इस महान यात्रा पर बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में किसी व्‍यक्ति की कल्‍पना के परे बहुत कुछ है। उन्‍होंने कहा कि यह क्रूज यात्रा विभिन्‍न तरह के अनुभव देगी।

भारत की ताकत को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि क्रूज पर्यटन और विरासत पर्यटन देश में ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब भारत विश्‍व भर के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। इस अवसर पर उत्‍तर प्रदेश और असम के मुख्‍यमंत्री, बिहार के उप-मुख्‍यमंत्री, केन्‍द्रीय जहाजरानी और पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल उपस्थित थे।

हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि एमवी गंगा विलास की यात्रा आज वाराणसी से शुरू हुई। एमवी गंगा विलास 51 दिनों में लगभग तीन हज़ार दो सौ किलोमीटर की यात्रा कर भारत और बांग्लादेश में 27 नदियों को पार करते हुए बांग्लादेश के रास्ते असम में डिब्रूगढ़ पहुंचेगा।

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