प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज तमिलनाडु के त्रिची में 20,140 करोड़ रुपए की लागत से 20 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल भवन का दौरा किया। यह टर्मिनल भवन 1100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है, दो-स्तरीय नया अंतर्राष्ट्रीय टर्मिनल भवन सालाना 44 लाख से अधिक यात्रियों और व्यस्त समय के दौरान लगभग 3500 यात्रियों को सेवा देने की क्षमता रखता है। नये टर्मिनल में यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुख-सुविधाएं और विशेषताएं हैं।
प्रधानमंत्री अनेक रेलवे परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित किया। इनमें 41.4 किलोमीटर लंबे सेलम-मैग्नेसाइट जंक्शन-ओमालूर-मेट्टूर बांध खंड के दोहरीकरण की परियोजना शामिल है; मदुरै-तूतीकोरिन तक 160 किलोमीटर के रेल लाइन खंड के दोहरीकरण की परियोजना; और रेल लाइन विद्युतीकरण के लिए तीन परियोजनाएं अर्थात तिरुचिरापल्ली- मनामदुरै- विरुधुनगर; विरुधुनगर – तेनकासी जंक्शन; सेनगोट्टई – तेनकासी जंक्शन – तिरुनेलवेली – तिरुचेंदूर शामिल हैं। रेल परियोजनाएं माल ढुलाई और यात्रियों को ले जाने की रेल क्षमता में सुधार करने में मदद करेंगी और तमिलनाडु में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में योगदान देंगी।
प्रधानमंत्री सड़क क्षेत्र की पांच परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित किया। परियोजनाओं में एनएच-81 के त्रिची-कल्लागम खंड के लिए 39 किमी लंबी चार लेन की सड़क शामिल है; एनएच-81 के कल्लागम-मीनसुरूट्टी खंड की 60 किमी लंबी 4/2-लेन; एनएच-785 के चेट्टीकुलम-नाथम खंड की 29 किमी लंबी चार-लेन की सड़क; एनएच-536 के कराईकुडी-रामनाथपुरम खंड के पक्के किनारे के साथ 80 किमी लंबी दो लेन; और एनएच-179ए सेलम – तिरुपथुर – वानियमबाडी रोड के 44 किमी लंबे खंड को चार लेन बनाना। सड़क परियोजनाएं क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और तेज़ यात्रा की सुविधा प्रदान करेंगी और त्रिची, श्रीरंगम, चिदंबरम, रामेश्वरम, धनुषकोडी, उथिराकोसमंगई, देवीपट्टिनम, इरवाडी, मदुरै जैसे औद्योगिक और वाणिज्यिक केन्द्रों की कनेक्टिविटी में सुधार करेंगी।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण सड़क विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। इनमें एनएच 332ए के मुगैयुर से मरक्कनम तक 31 किमी लंबी चार लेन की सड़क का निर्माण शामिल है। यह सड़क तमिलनाडु के पूर्वी तट पर बंदरगाहों को जोड़ेगी, विश्व धरोहर स्थल – मामल्लपुरम तक सड़क सम्पर्क बढ़ाएगी और कलपक्कम परमाणु ऊर्जा संयंत्र को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।
