देश में अब तक 140 करोड़ बैंक खातों में से 120 करोड़ खाते आधार से जोड़े जा चुके है

देश में अब तक 140 करोड़ बैंक खातों में से 120 करोड़ खाते आधार से जोड़े जा चुके है

देश में अब तक 140 करोड़ बैंक खातों में से 120 करोड़ खाते आधार से जोड़े जा चुके हैं। भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी डॉक्‍टर सौरभ गर्ग ने बताया कि देश में लगभग 29 लाख माइक्रो एटीएम के माध्‍यम से लोग आधार पर आधारित भुगतान प्रणाली का उपयोग करके वित्‍तीय लेनदेन कर रहे हैं।

आधार से सबको एक वित्‍त पता मिला है और इसी से वित्‍तीय समावेश का लक्ष्‍य जो है फइानेन्सियल इन्‍क्‍लुजन, इस समावेश के लक्ष्‍य को लेकर आधार का बहुत बड़ा महत्‍वपूर्ण भाग रहा है। इससे एक सबसे बड़ा फायदा ये है कि समाज के जो सीमांत वर्ग हैं, वो लोगों का आपैचारिक वित्‍तीय प्रणाली में प्रवेश हो सका है, जो अब तक कोई बैंक में नहीं जा सकते थे, या लोन नहीं ले पाते थे, वो इसके होते हुए, वो वित्‍तीय प्रणाली में आ सके हैं, और उन्‍हें सब सुविधाएं मिलने का सुयोग मिल पाया है।

डॉक्‍टर गर्ग ने कहा कि सरकार जनधन, आधार और मोबाइल- तीन बातों पर जोर दे रही है जिसकी वजह से सरकारी कल्‍याण कार्यक्रमों के लागू होने में पारदर्शिता आई है और इससे वित्‍तीय समावेशी के माध्‍यम से समाज के वंचित वर्ग अर्थव्‍यवस्‍था की मुख्‍यधारा में शामिल हो पाए हैं।

कल्‍याणकारी सेवाएं हैं, जैसे कि एलपीजी सब्सिडी पहल है, मनरेगा है, पेंशन है, पीएम किसान है, इन सभी स्‍कीमों में डीबीटी के डायरेक्‍ट माध्‍यम से लोगों के पास पैसा जा सका है। इससे जो एक वित्‍तीय समावेश है वो जनधन, आधार और मोबाइल के जोड़ने से सम्‍भव हुआ है और मेरा मानना है कि लोगों का इससे बहुत फायदा हुआ है।

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के वित्‍तीय समावेशी और डिजिटीकरण के बारे में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि एईपीएस, भीम, आधार पे और माइक्रो एटीएम के जरिए उन स्‍थानों के लोग भी वित्‍तीय प्रणाली से जुड़ रहे हें जहां बैंक नहीं है।

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