दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि केन्द्र शासित प्रदेश होने के कारण दिल्ली सरकार की सेवाएं केन्द्र सरकार के नियंत्रण में आती हैं। न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के अंतर्गत आने वाली सेवाएं आवश्यक रूप से केन्द्र की सेवाएं हैं और वे पहली सूची की 70वीं प्रविष्टि में शामिल की गई हैं। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों के समान दिल्ली में राज्य लोकसेवा आयोग नहीं है। न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि दिल्ली विधानसभा राज्य सूची की पहली-दूसरी और 18वीं प्रविष्टि और केन्द्रीय सूची की 70वीं प्रविष्टि में आने वाले किसी भी विषय पर कानून बनाने के लिए पात्र नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सरकार अधिनियम 1991 के अनुच्छेद 41 के अनुसार उपराज्यपाल को इन मामलों में स्व-विवेक के आधार पर काम करना चाहिए न कि मंत्री-परिषद की सलाह पर। न्यायालय ने 2002 में विधानसभा में एक पद के सृजन और 2013 में उस पद पर नियुक्त व्यक्ति की सेवाओँ की समाप्ति से संबंधित मामले पर सुनवाई के दौरान यह बात कही।
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