जी-20 देशों की संसद के पीठासीन अध्यक्षों की दो दिवसीय बैठक पी-20 आज नई दिल्ली में संपन्न हो गई। समापन सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि सदस्य देशों की संसदों के प्रतिनिधियों द्वारा शिखर सम्मेलन में संयुक्त वक्तव्य अपनाया जाना गौरव की बात है। यह संसदीय प्रणाली के प्रति सदस्य देशों की प्रतिबद्धता को व्यक्त करता है। इस अवसर पर ओम बिडला ने ब्राजील को पी-20 की अगली बैठक की अध्यक्षता सौंपी।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस बार सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में इन चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों की संसदो की ओर से क्या प्रयास किए जाते हैं। बैठक के सामानांतर आयोजित एक कार्यक्रम में ओम बिडला ने तुर्किए और रूस की संसद के अध्यक्षों के साथ विचार-विमर्श किया। उन्होंने अंतर संसदीय संघ- आईपीयू के अध्यक्ष डुआर्टे पाचेको से भी मुलाकात की। बाद में एक सोशल मीडिया पोस्ट में ओम बिरला ने कहा कि भारत और आईपीयू लोकतांत्रिक शासन और मजबूत संसदीय प्रणाली को बढावा देने के साझा एजेंडें पर काम कर रहे हैं।
भारत की जी 20 की अध्यक्षता के व्यापक फ्रेमवर्क के तहत आयोजित इस दो दिवसीय शिखर बैठक का विषय एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य के लिए संसद था। बैठक में 25 वक्ताओं, सदस्य देशों के 10 उपाध्यक्षों और 50 सांसदों सहित कई लोगों ने भाग लिया। अफ़्रीकी देशों की संसद के प्रतिनिधि पहली बार इसमें शामिल हुए।
शिखर बैठक के दौरान सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों को गति देने, पांरपरिक ऊर्जा से हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढने, महिलाओं के नेतृत्व में विकास और सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से लोगों के जीवन में बदलाव लाने जैसे विषयों पर चार सत्र आयोजित किए गए।
पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली अपनाने को बढावा देने के लिए शिखर बैठक से पूर्व अलग से एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर बैठक के उदघाटन अवसर पर कल स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघर्षों और टकराव से भरा विश्व किसी के भी हित में नहीं हो सकता है। आज का समय शांति और भाईचारे का है। संसदों के पीठासीन अधिकारियों और आमंत्रित देशों ने सम्मेलन के पहले दिन सर्वसम्मति से एक संयुक्त वक्तव्य पर सहमति व्यक्त की। इसमें जी20 प्रक्रिया में संसद के स्तर पर प्रभावी और सार्थक योगदान देने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। इसमें यह भी कहा गया है कि संसदें संघर्षों और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति, समृद्धि और सद्भाव को बढ़ावा देने के उत्प्रेरक के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सार्थक वार्ता जारी रखेंगी।