एसजेवीएन लिमिटेड ने अपनी सुरंग परियोजनाओं में उन्नत भूवैज्ञानिक मॉडल का उपयोग करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- पटना (आईआईटी पटना) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे समय और लागत में काफी कमी आएगी।
इस साझेदारी के प्रमुख परिणामों में से एक प्रीडिक्टिव एनालिटिक्स एल्गोरिदम्स का विकास होगा। ये एल्गोरिदम एकीकृत भू-तकनीकी डेटा का लाभ उठाकर संभावित जोखिमों का पहले से अनुमान लगाएंगे और विशेष रूप से सुरंग परियोजनाओं के लिए तैयार की गई प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली प्रदान करेंगे। इस तरह के सक्रिय उपायों से परियोजना कार्यान्वयन के दौरान समय और लागत में काफी कमी होने की आशा है।
एसजेवीएन की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गीता कपूर ने कहा कि एमओयू की प्राथमिकता अत्याधुनिक कार्यप्रणाली विकसित करना है, जो विविध भू-तकनीकी डेटा स्रोतों को एकीकृत करती है। इनमें एसजेवीएन की परियोजनाओं से संबंधित भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, बोरहोल डेटा, भूभौतिकीय माप और निगरानी डेटा शामिल होंगे।
इस सहभागिता का उद्देश्य ओवरबर्डन व डिफोर्मेशन (विरूपण) के बीच जटिल संबंधों का मूल्यांकन करना भी है, जिससे सुरंग परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण समर्थन प्रणालियों के मूल्यांकन और डिजाइन को संवर्द्धित किया जा सके। एकीकृत भू-तकनीकी डेटा और 3डी भूवैज्ञानिक मॉडल का उपयोग करके, एसजेवीएन और आईआईटी- पटना का लक्ष्य संभावित जोखिमों व खतरों की पहचान करना और उनका विश्लेषण करना है।
2 अप्रैल, 2024 को नई दिल्ली में एसजेवीएन के निदेशक (वित्त), ए.के. सिंह और आईआईटी- पटना के निदेशक टी.एन. सिंह की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर एसजेवीएन की ओर से सीजीएम (सिविल) आरके गुप्ता, जीएम (वित्त) जितेंद्र यादव, जीएम (सिविल) हेमंत कुमार शाक्य व जीएम (भूगोल) अक्षय आचार्य और आईआईटी पटना के प्रोफेसर एके वर्मा उपस्थित थे।
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