पर्यटन मंत्रालय ने “देखो अपना देश” श्रृंखला के तहत 30 मई, 2020 को “द टिनैसिटी ऑफ सर्वाइवल-इनस्पिरेशनल स्टोरी ऑफ कच्छ” विषय पर 26वां वेबिनार आयोजित किया। वेबिनार में भारत के सबसे बड़े जिले कच्छ के इतिहास, संस्कृति, शिल्प, वस्त्र विरासत को प्रदर्शित किया गया। सत्र में कच्छ के लोगों के कौशल पर भी चर्चा हुई जिसे भारतीय सभ्यता को परिभाषित करने वाली निरंतर गतिशीलता का रिपोर्ट कार्ड भी कहा जा सकता है। वेबिनार में “कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा” संदेश के साथ कच्छ के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गयी। देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला, एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत भारत की समृद्ध विविधता को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है।
पर्यटन मंत्रालय की अपर महानिदेशक सुश्री रूपिंदर ब्रार ने वेबिनार के इस सत्र का संचालन किया और भारतीय सांस्कृतिक विरासत अनुसंधान की निदेशक डॉ नवीना जफा ने इसे प्रस्तुत।
सुश्री जफा ने अपने शक्तिशाली कथन कौशल के माध्यम से विषम भौगोलिक विशेषताओं और आनुवंशिक कॉकटेल को प्रस्तुत किया जो भारत को सर्वाधिक नाटकीय तरीके से परिभाषित करता है।
कच्छ नमक के रेगिस्तान, घास के मैदान और मैंग्रोव की भूमि है। दिलचस्प बात यह है कि यहां के मैंग्रोव दुनिया के एकमात्र इनलैंड मैंग्रोव होने के लिए जाने जाते हैं। अकेले कच्छ का रण भारत की कुल नमक आपूर्ति का तीन-चौथाई उत्पादन करता है। यहाँ ऊंट की खैरी नस्ल भी पाई जाती है, जिसमें सूखी जमीन के साथ-साथ खारे पानी में भी जीवित रहने की विशेष क्षमता होती है। वे समुद्र के पानी में भी तैर सकते हैं और खारे पानी और पौधों पर जिन्दा रह सकते हैं। वे रेगिस्तान के चरम जलवायु और पानी की उच्च लवणता के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित हैं।
प्रस्तुति का मुख्य आकर्षण अजरख पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटर समुदाय की वर्चुअल यात्रा थी। अजरख वस्त्रों पर छपाई के सबसे पुराने तरीकों में से एक है, और भारत में गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अभी भी इसका प्रयोग किया जाता है। इस शैली के वस्त्रों की हाथ से व दोनों तरफ छपाई की जाती है, प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है, जो प्रतिरोध की छपाई (रेजिस्ट प्रिंटिंग) की एक श्रमसाध्य और लंबी प्रक्रिया द्वारा पूरा किया जाता है (छपाई की एक विधि जिसमें पैटर्न में निर्दिष्ट क्षेत्रों को डाई द्वारा पहुँचने से रोका जाता है)।
इसके बाद प्रतिभागियों को कच्छ के बन्नीथे साल्ट रेगिस्तान की सैर कराई गयी, जहां मिट्टी के बर्तनों, कढ़ाई और चमड़े के काम में लगे तीन प्रमुख स्वदेशी समुदायों के काम को प्रदर्शित किया गया। सुश्री जाफा ने कान फटे तपस्वियों के मठ (सिद्धि सिधांत संप्रदाय) और मठ द्वारा चलाए जा रहे लंगर (सामुदायिक रसोई) के बारे में बताया।
प्रस्तुति में तटीय शहर मंडावी को भी कवर किया गया, जहां क्षेत्रीय सूफी मान्यताएं अरब सागर पर पारंपरिक नाव बनानेवालों का मार्गदर्शन करती हैं।
वेबिनार में दिखाये गए कच्छ के अन्य मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं:
धोलावीरा- यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल और भारत में स्थित दूसरा सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल। यह वास्तव में शहर की योजना और वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है।
जीवाश्म पार्क
कच्छ का रण – अरब सागर का नमक का रेगिस्तान
काला डूंगर
गुरु गोरखनाथ मंदिर
नारायण सरोवर मंदिर
लखपोर्ट किला और बंदरगाह
सुरहंडो- मोर के आकार का अद्वितीय वाद्य यंत्र जो मधुर संगीत देता है
थाली नृत्य- विवाह और बच्चे के जन्म के उत्सव को मनाने के लिए एक नृत्य
तूफ़ान- सागर का प्रसिद्ध जंगली नृत्य जिसे “समुंदर की मस्ती” भी कहा जाता है
वाई सूफी फकीर
गुजरात के कच्छ जिले के भुज तालुका में एक गाँव है – धोर्डो। इस जगह की पारितंत्र प्रणाली पर्यटन के अलावा किसी भी अन्य गतिविधि के लिए अनुकूल नहीं है। रण उत्सव जो नवम्बर से मार्च तक प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है गुजरात में पर्यटन के लिए मुख्य कार्यक्रम बन गया है। सबसे चुनौतीपूर्ण स्थान धोर्डो व्हाइट रण, सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप विकसित हुआ है। इस परिवर्तन से धोर्डो में और उसके आसपास कई अस्थायी और स्थायी आवास संरचनाएं बन गई हैं। मानवीय धैर्य, कल्पना और उद्यम ने एक कठोर और असामान्य इलाके को सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक जीवंतता के केंद्र में बदल दिया है, जिससे लोगों में आत्मनिर्भरता और गौरव की भावना पैदा हुई है। उन सभी में सबसे लोकप्रिय गुजरात पर्यटन के समर्थन से आयोजित रण उत्सव टेंट सिटी है।
हर साल आयोजित होने वाला रण महोत्सव दिसंबर से फरवरी तक मनाया जाता है। भुज शहर को मूलभूत सुविधाओं के साथ एक टेंट सिटी में बदल दिया जाता है। उत्सव के आकर्षण हैं – बीएसएफ बैंड, हॉट एयर बैलूनिंग गतिविधियों, लोक संगीत और नृत्य तथा पारंपरिक व्यंजन।
कच्छ की वास्तविक भावना को समझने के लिए 3-4 दिनों और 7-8 दिनों के यात्रा कार्यक्रम साझा किये गए थे। यात्रा कार्यक्रम का उद्देश्य कच्छ की यात्रा करने वाले पर्यटकों का मार्गदर्शन करना, चीजों, स्थानों या पर्यटन स्थलों के बारे में बताना और संस्कृति, परंपराओं, वस्त्रों, ब्लॉक प्रिंटिंग, संगीत वाद्ययंत्रों, बाजार स्थानों, गांव के पर्यटन और नृत्य रूपों को दिखाना था।
भुज, गुजरात में अपने पड़ोसी शहरों से सड़क द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, देश के विभिन्न हिस्सों खास कर दिल्ली और मुंबई से अच्छी रेल कनेक्टिविटी है और रुद्र माता हवाई अड्डे से हवाई मार्ग के द्वारा भी पहुँचा जा सकता है।
वेबिनार के सत्र अब https://www.youtube.com/channel/UCbzIbBmMvtvH7d6Zo_ZEHDA/fatured पर और भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सभी सोशल मीडिया हैंडल पर उपलब्ध हैं।
2 जून 2020 को पूर्वाह्न 11:00 बजे के लिए निर्धारित वेबिनार की अगली कड़ी का शीर्षक है- ‘हरियाणा: संस्कृति, खान-पान और पर्यटन’ । कृपया अपना पंजीकरण यहाँ करें: https://bit/ly/3dmTbmz
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