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सरकार ने वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही के दौरान 3,20,249 करोड़ रुपये की दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी की

वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के अंतर्गत बजट प्रभाग में लोक ऋण प्रबंधन प्रकोष्ठ (पीडीएमसी नियमित आधार पर ऋण प्रबंधन पर अप्रैल-जून (पहली तिमाही ) 2010-11 से एक त्रैमासिक रिपोर्ट निकाल रहा है। वर्तमान रिपोर्ट जनवरी-मार्च 2021 (वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही) से संबंधित है।

वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही के दौरान, केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020 की चौथी तिमाही की तुलना में जारी की गई 76,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों मुकाबले 3,20,249 करोड़ रुपये की दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी की, जबकि पुनर्भुगतान 29,145 करोड़ रुपये था। प्राथमिक निर्गमों की भारित औसत उपलब्धि वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में बढ़कर 5.80 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही में 5.68 प्रतिशत थी। दिनांकित प्रतिभूतियों के नए निर्गमों की भारित औसत परिपक्वता वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में 13.36 वर्ष पर कम थी, जबकि वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही में यह 14.96 वर्ष थी। जनवरी-मार्च 2021 के दौरान केंद्र सरकार ने नकद प्रबन्धन बिल (कैश मैनेजमेंट बिल) के जरिए कोई राशि नहीं जुटाई। रिज़र्व बैंक ने तिमाही के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री को शामिल करते हुए नौ विशेष और सामान्य ओएमओ आयोजित किए। सीमांत स्थायी सुविधा और विशेष चलनिधि सुविधा सहित चलनिधि समायोजन सुविधा (लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी -एलएएफ) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुद्ध दैनिक औसत चलनिधि अवशोषण (एवरेज लिक्विडिटी अब्जोरप्शन) इस तिमाही के दौरान 3,35,651 करोड़ रुपये था।

सरकार की कुल देनदारियां (‘लोक/सार्वजनिक खाते’ के तहत देनदारियों सहित), अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2021 के अंत में बढ़कर 1,16,21,781 करोड़ रुपये हो गई, जो दिसंबर 2020 के अंत में 1,09,26,322 करोड़ रुपये थी। यह वित्त वर्ष 21 की चौथी तिमाही में 6.36 प्रतिशत की तिमाही-दर-तिमाही वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है । मार्च 2021 के अंत में कुल बकाया देनदारियों का 88.10 प्रतिशत सार्वजनिक ऋण था। बकाया दिनांकित प्रतिभूतियों के लगभग 29.33 प्रतिशत की शेष परिपक्वता 5 वर्ष से कम थी। स्वामित्व पैटर्न मार्च 2021 के अंत में वाणिज्यिक बैंकों की हिस्सेदारी 37.8 प्रतिशत और बीमा कंपनियों के लिए 25.3 प्रतिशत पर इंगित करता है।

तिमाही के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों की आपूर्ति में वृद्धि के कारण द्वितीयक बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल आना कठिन हो गया। इसके अलावा, साप्ताहिक उधारी में वृद्धि और रिज़र्व बैंक द्वारा सामान्य चलनिधि(लिक्विडिटी) संचालन को फिर से शुरू करने की घोषणा के कारण प्राप्तियों-प्रतिफल का कठिन होना इस विचलन (वक्र) के छोटे छोर पर अधिक था। हालांकि, इन प्राप्तियों को 5 फरवरी, 2021 को आयोजित एमपीसी की बैठकों के निर्णय द्वारा समर्थन दिया गया था, जिसमें एमपीसी ने नीति रेपो दर को 4 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा और इसे कम से कम चालू वित्तीय वर्ष के दौरान और अगले वित्तीय वर्ष में समायोजन के रुख के साथ जारी रखने पर जोर दिया – ताकि टिकाऊ आधार पर विकास को फिर से शुरू करने के साथ ही अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव को कम किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि आने वाले समय में भी मुद्रास्फीति भी लक्ष्य के भीतर बनी रह सके।

Dheeru Bhargav

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